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चैत्र नवरात्र का पांचवा दिन: मां बागेश्वरी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़, माता विशालाक्षी गौरी के दर्शन का भी विधान, जानिए आज के पूजा का महत्व

Varanasi : चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता के दर्शन-पूजन का विधान है। काशी में स्कंदमाता बागेश्वरी देवी के रूप में स्थित हैं। जैतपुरा स्थित मंदिर में सुबह मंगला आरती के बाद से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन को उमड़े। मीरघाट स्थित धर्मकूप इलाके में स्थित विशालाक्षी गौरी के दर्शन-पूजन के लिए भक्त पहुंचे।

मंदिर के महंत ने बताया कि मां बागेश्वरी को स्कंद पुराण में देवी दुर्गा का पांचवां स्वरुप बताया गया है। बागेश्वरी देवी का भोर में पंचामृत स्नान के बाद गुड़हल, गुलाब, गेंदा आदि के फूलों से मां का श्रृंगार किया गया। भोर की मंगला आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। पट खुलते ही चुनरी, नारियल और फूल लेकर जय माता दी के जयकारे लगा रहे कतारबद्ध श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। महंत बागेश्वरी प्रसाद मिश्र ने बताया कि मां बागेश्वरी देवी का दर्शन-पूजन करने से सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

कतारबद्ध भक्तों की एक ही मनोकामना थी कि अब दोबारा से कोरोना की महामारी न आये ट। हमें ऐसे ही दर्शन सुगमता से हो। सभी ने विश्व में शांति और सौहार्द की कामना के साथ माता के आगे शीश नवाये।

उधर, मीरघाट क्षेत्र के धर्मकूप इलाके में विशालाक्षी गौरी के दर्शन को भक्त उमड़ पड़े। मान्‍यताओं के मुताबिक, काशी देवी गौरी का घर है। भगवान शंकर की काशी में देवी गौरी के नौ स्‍वरूपों के तौर पर काशी में आस्‍था का ज्‍वार नवरात्र में उमड़ता है। धर्मकूप क्षेत्र स्थित माता के मंदिर में लोगों की लंबे समय से आस्‍था रही है। मंदिर में दर्शन-पूजन का क्रम लंबे समय से चलता रहा है लेकिन, चैत्र या वासंतिक नवरात्र के मौके पर मंदिर में दर्शन-पूजन की मान्‍यता होने की वजह से लोगों का मंदिर में नवरात्र की पंचमी को आगमन होता है।

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