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VDA सचिव, पांच नामजद और आधा दर्जन अज्ञात लोगों पर FIR : Varanasi के अधिवक्ता ने लगाया संगीन आरोप, पढ़िए किन धाराओं में कायम हुआ है मुकदमा

Varanasi : कोर्ट के आदेश पर VDA सचिव, पांच नामजद और 6 अज्ञात लोगों के खिलाफ शिवपुर थाने में मुकदमा कायम हुआ है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने वाराणसी विकास प्राधिकरण के सचिव, जोनल अधिकारी सहित छह अज्ञात लोगोॉ के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने धमकी देने का मुकदमा कायम कराया है। थाना स्तर पर एफआईआर न दर्ज होने पर वह न्यायालय की शरण में पहुंचे। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रपट दर्ज करने का आदेश दिया।

अधिवक्ता ने अपनी तहरीर में बताया है कि वह विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी (अर्दली बाजार) के रहने वाले हैं। पत्नी संगीता सिंह के नाम से तरना में 3150 वर्कफीट जमीन उन्होंने खरीदा है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2022 को विकास प्राधिकरण के जोनल अधिकारी परमानंद यादव, जूनियर इंजीनियर रामचंद्र, VDA सचिव सुनील कुमार वर्मा, पीएन दुबे, प्रमोद तिवारी और पांच-छह अज्ञात लोग उनके तरना स्थित जमीन पर पहुंच गए। बाउंड्री को तोड़ने लगे।

जब वह पहुंचे तो देखा कि विकास प्राधिकरण के कुछ अधिकारी और कर्मचारी JCB द्वारा बाउंड्री को गिरा रहे हैं। अजय सिंह द्वारा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह प्लाट अवैध है। बाउंड्री का नक्शा पास नहीं है। बाउंड्री गिरा रहे हैं।

अधिवक्ता ने VDA के अधिकारियों से कहा कि उनके घर के सामने जो दो मंजिला मकान बना है और जो अगल-बगल मकान बन रहा है क्या उसका नक्शा पास है? आरोप है, तब VDA के अधिकारियों द्वारा भय दिखाते हुए कहा गया कि यदि ₹15000 दे दोगे तो तुम्हारा बाउंड्री नहीं गिरेगी। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की नीयत से एक अपराधिक साजिश के तहत जबरदस्ती उनके निजी संपत्ति बाउंड्रीवाल और गेट को तोड़ दिया गया। भय दिखाकर गेट को उठा ले गए।

उन्हें तकरीबन चार लाख रुपये की क्षति हुई। उन्होंने कहा कि VDA के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उनके साथ गाली गलौज किया गया। मारने पीटने की धमकी दी गई। वकालत पेशे को अपमानित किया गया। जान से मारने की धमकी भी दी गई। उनकी काफी मानहानि हुई।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि वह इस बाबत शिकायत लेकर वह शिवपुर थाने गए। वहां पर यह कह कर मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया कि जबतक किसी ऊपर के अधिकारी का आदेश न हो तबतक हमारे यहां किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा जाएगा। अधिवक्ता ने तहरीर में लिखा है कि उन्होंने प्रार्थना पत्र रजिस्ट्री के जरिए पुलिस कमिश्नर वाराणसी और जिलाधिकारी वाराणसी को भी भेजा। कार्रवाई नहीं हुई। वह न्यायालय की शरण में गए।

ये है FIR की कॉपी

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