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चार दिनी कृषक प्रशिक्षण : फसलो में लगने वाले रोग, कीटों और खरपतवार प्रबंधन पर चर्चा, सीड ड्रिल के इस्तेमाल की जानकारी दी गई

Ghazipur : आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, अंकुशपुर, गाज़ीपुर में शुक्रवार को चार दिनी कृषक प्रशिक्षण अरहर बीज उत्पादन का समापन हुआ। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्येश्य अरहर की गुणवत्ता युक्त पैदावार को बढ़ाना है जिससे जनपद के किसान आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही मिटटी की उर्वरा शक्ति भी बना रहें है और कुपोषण को भी दूर किया जा सकता है।

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अमरेश कुमार सिंह ने दुधारू पशुओं के आहार में दलहनी फसलों के प्रयोग और उनसे लाभ पर चर्चा किया। उक्त अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिक और प्रशिक्षण संयोजक डॉ. नरेंद्र प्रताप ने दलहनी फसलो के महत्त्व पर चर्चा करते हुए अरहर बीज उत्पादन के समय हमें सबसे पहले प्रजाति का चयन, अरहर की अन्य प्रजातियों से चयनित प्रजाति के खेतो के बीच के अंतर इत्यादि बातों को ध्यान में रखा कर बीज उत्पादन करने की सलाह दिया।

वैज्ञानिक डॉ. शशांक शेखर ने अरहर की बुआई के लिए प्रयुक्त सीड ड्रिल के प्रयोग औरवउनका रख रखाव के बारे में जानकारी दिया। डॉ. ऐके राय मृदा वैज्ञानिक ने कहा कि अरहर एक दलहनी फसल है जो वातावरण में मौजूद नाइट्रोज को हमारी मृदा में स्थित करने का कार्य करती है इसलिए इन फसलों में मृदा जांच के उपरांत ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शशांक सिंह ने फसलो में लगने वाले रोगों, कीटों के प्रबंधन और खरपतवार प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा किया। प्रशिक्षण में प्रगतिशील कृषक तेज बहादुर सिंह, उमेश सिंह, सूर्यनाथ यादव, महेंद्र पाल, राजेंद्र पाल सहित 30 कृषक शामिल थे।

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