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गंगा दशहरा 2022 : गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, उमड़ा आस्था का रेला, स्‍नान और दान के परंपराओं का निर्वहन, मंदिरों में लगी भीड़, गंगोत्री सेवा समिति की ओर से की जाएगी महाआरती

Santosh Pandey

Varanasi : पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर गुरुवार को शिव की नगरी काशी में उत्सव मनाया जा रहा है। गंगा दशहरा के दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास आदि करने के लिए काशी में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़े हैं। अस्सी, दशाश्वमेध से लेकर राजघाट तक हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। गंगा के इस पार से लेकर उस पार तक मेले जैसा मंजर है। घाटों पर आस्थावानों की भीड़ को देखते हुए सुगम व्यवस्था की गई है। ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच काशी विश्वनाथ, संकटमोचन, बाबा कालभैरव समेत अन्य मंदिरों में भीड़ उमड़ी है। भीषण गर्मी होने के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं है। घाटों से लेकर मंदिरों और गलियों तक पुलिस मौजूद थे।

आज ही के दिन मां गंगा का हुआ था अवतरण

हस्त नक्षत्र में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्वाह्न व्यापिनी दशमी तिथि पर ही राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था। यही कारण है कि आज गंगा स्नान का बड़ा महत्व है। आधी रात के बाद से ही देश के कोने-कोने से स्नानार्थियों की भीड़ गंगा किनारे पहुंचने लगी थी। दशाश्वमेध घाट समेत अन्य घाटों पर संतों, भक्तों के डेरे जहां-तहां पड़े हुए थे। भोर में ही घंट-घड़ियाल की गूंज के साथ स्नान आरंभ हो गया। गंगा दशहरा पर काशी में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का अनुमान है।

पापों से मिलती है मुक्ति

ज्योतिषाचार्य पंडित लोकनाथ शास्त्री ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि नौ जून को पूर्वाह्न व्यापिनी दशमी तिथि के दिन ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गरकरण ओर कन्या राशि का चंद्रमा मिल रहा है। बुधवार को अर्द्धरात्रि के पश्चात 3:08 पर लगेगी और नौ जून को मध्यरात्रि के पश्चात 2:26 बजे तक रहेगी।

दशाश्वमेध घाट पर विशेष आयोजन

गंगा दशहरा पर दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आज मां भागीरथी का विशेष पूजन करने साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। भोर से ही घाट पर गंगा स्नान कर पुण्य की डुबकी लगाने का क्रम जारी है। गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमण दूबे ‘बाबू महाराज’ ने बताया कि ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर पड़ने वाला गंगा दशहरा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान कर जरूरतमंदों में दान-पुण्य करने का प्रतिफल कई गुना होता है। साथ ही गंगा दशहरा पर मां जाह्नवी के विशेष पूजन-अर्चन का विधान भी है। गंगा दशहरा के दिन सूर्यास्त के बाद मां गंगा का विशेष पूजन अर्चन शुरू किया जाएगा। साथ ही घाट पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन और मां सुरसरि की 11 ब्राह्मणों द्वारा महाआरती की जाएगी। उधर, समिति के संदीप दूबे सोनू ने बताया कि केदारघाट पर भी गंगोत्री सेवा समिति के द्वारा गंगा दशहरा पर मां गंगा की महाआरती और हवन-पूजन किया जाएगा।

संत समिति ने अस्सी घाट पर किया पूजा-पाठ

गंगा दशहरा के मौके पर अस्सीघाट पर साधू-संतों ने भी गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई और गंगा तट पर पूज पाठ किया। साधु संतों ने पूजन अर्चन के साथ साथ आदि विशेश्वर की मुक्ति की कामना की। मां गंगा के पूजन अर्चन में महंत बालकदास, स्वामी जीतेंद्रानंद व डंडी स्वामी भी मौजूद रहे। स्वामी जीतेंद्रानंद ने कहा कि मां गंगा आज सबको दस प्रकार के पापों से मुक्ति देती हैं। मां गंगा ही आदि विशेश्वर की मुक्ति कराएंगी। स्वामी जीतेंद्रानंद ने बताया कि जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ का मंदिर तोड़ दिया था, उसके 100 वर्ष बाद महारानी अहिल्याबाई होलकर काशी आई, उस वक्त मंदिर बनाने में काफी बाधाएं आ रही थी तो उन्होंने होलकर घाट पर सबसे पहले मां गंगा का एक मंदिर बनवाया। इसके बाद मां गंगा के आशीर्वाद से बाबा विश्वनाथ के मंदिर का निर्माण हुआ। बताया कि हर साल की तरह गंगा दशहरा पर सभी संप्रदायों को काशी के संत गंगा घाट पर आते हैं और पूजन-अर्चन कर देश के सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इस साल बस एक नई कामना जुड़ी है, जो विश्वेश्वर महादेव की है। ज्ञानवापी परिसर में प्रकट होने के बाद मां गंगा ही उनकी मुक्ति का मार्ग दिखाएगी।

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