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आज पूजी जाएंगी ज्ञान और विद्या की देवी: पंडालों में पहुंची वीणावादिनी की प्रतिमाएं, ये है पौराणिक मान्यता

Varanasi : आज वसंत पंचमी है। आज घरों और शिक्षण संस्थानों में ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का पूजन होगा। वसंत पंचमी पर अभिजीत मुहूर्त में मां वाग्देवी का पूजन कर श्रद्धालु मां सरस्वती से ज्ञान का आशीर्वाद लेंगे। मां शारदा के पूजन के साथ ही फाग का उल्लास भी शुरू हो जाएगा। देर रात तक पंडालों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं के पहुंचने का दौर चलता रहा। तीन सौ से अधिक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। आज घरों से लेकर शिक्षण संस्थानों में वसंत पंचमी पर मां सरस्वती का आह्वान होगा। बुधवार को मां सरस्वती की पूजा के लिए शिव की नगरी काशी में उल्लास नजर आया। लक्सा, गोदौलिया, चौक, अर्दली बाजार व मंडुवाडीह इलाकों में मूर्ति की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। माला-फूल की दुकानों पर भी वसंत पंचमी के पूजन के लिए फूल-माला के साथ ही धान, सरसों और नई फसल की बालियों को खरीदारी होती रही। पंडालों में प्रतिमाओं को ले जाने का सिलसिला भी अनवरत चलता रहा। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि पंचमी तिथि बुधवार की शाम को 5:58 बजे से शुरू हो गई है और 26 जनवरी को शाम 4:17 बजे तक रहेगी।

हिंदू धर्म में माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। ये पर्व विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। जिस कारण इस त्योहार को सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी को बागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी भी कहते है्ं। इस दिन किसी भी तरह के मांगलिक कार्य जैसे मुंडन संस्कार, नया कार्य शुरू करना, अन्नप्राशन, गृह प्रवेश आदि बिना मुहूर्त देखे किये जा सकते हैं। क्योंकि इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इतना ही नहीं ये दिन विवाह के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा जी ने समस्त संसार की रचना की थी। लेकिन फिर भी उन्हें अपनी रचना में कमी महसूस हुई। इसलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे ही उन्होंने वीणा बजायी ब्रह्मा जी के बनाई हर चीज में मानो सुर आ गया। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उन्हें देवी सरस्वती का नाम दिया। मान्यताओं अनुसार जिस दिन मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई वो दिन बसंत पंचमी का था। यही कारण है कि हर साल बसंत पंचमी के दिन को देवी सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है और उनकी इस दिन विशेष पूजा की जाती है।

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