बड़ी बोल 

Guest Writer : बड़े खुशनसीब हैं वो जो बेनूर हुए पैदा, उनकी जुबां को हासिल नहीं मिलावट है

नकली सामानों की ठगती सजावट है, जिंदगी की कशमकश ही घबराहट है।

उनके उसूल किरदारों का साथ नहीं देते, शर्माती हुई पलकों में सिमटी हुई चाहत है।

उनकी नजरें उनकी हैं उन्ही का है नजरिया, रुसवा भी वही हुए हैं यही तो राहत है।

बड़े खुशनसीब हैं वो जो बेनूर हुए पैदा, उनकी जुबां को हासिल नहीं मिलावट है।

मुझको भी सिखा दो ये खास हुनर ‘बांके’, जख्मी जिगर लिए कैसे चेहरे पे मुस्कुराहट है।

Disclaimer

Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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