बड़ी बोल 

Guest Writer : आश्चर्य नहीं आनंदित होना, काम-क्रोध-मद-लोभ सलौना, संशय से आशय है कहता, निमेष धरा पर भेष है रहता

Banke Banarasi Pankaj

अतिशय कुछ भी शेष न रहता, आलिंगन बंधन ना सहता।

निर्विकार अव्यक्त नहीं है, सत्य सर्वथा त्यक्त नहीं है।

अहंकार का दोष नहीं है, कर्ता को किंचित होश नहीं है।

कारण कार्य स्वार्थ और आशा, निर्विकार मन की अभिलाषा।

शांत कभी अवशेष न रहता, संकल्प विकल्प का बोध न सहता।

सुख मात्र एक ज्ञान नहीं है, अपरिमित विज्ञान नहीं है।

आश्चर्य नहीं आनंदित होना, काम-क्रोध-मद-लोभ सलौना।

संशय से आशय है कहता, निमेष धरा पर भेष है रहता।

Disclaime

नोट- Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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