बड़ी बोल 

Guest Writer : एहसास से दिलासा मुझको दे जाते हो पर, अच्छा हो कुछ मिलने का भी इंतजाम हो जाए

इस कदर न तड़प जिंदगी दुश्वार जीना हो जाए, दरिया ए जिंदगी में दिल का सफीना खो जाए।

गुनगुनाने के लिए काफी है तन्हाई मगर, तेरी ग़ज़लों से सजी इक शाम हो जाए।

मैं इरादे भी बदल कर मर नहीं सकता यूंही, जीने को इत्मीनान कुछ तो इंतजाम हो जाए।

कोई तराना बने एहले सुकून के लिए, कोई कलाम अपना भी नाम दोहराए।

एहसास से ‘बांके’ दिलासा मुझको दे जाते हो पर, अच्छा हो कुछ मिलने का भी इंतजाम हो जाए।

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