बड़ी बोल 

Guest Writer : एहसान का एहसास मुद्दतों रहेगा जिंदा, तकलीफ लम्हा भर की हो उसे सताने दो

Banke Banarasi Pankaj

हटा दो रुख़ से पर्दा नजर लग जाने दो, ज़रा ख़िलते हुए मेहताब नजर आने दो।

अब इनायत कर ही दो मुझ पर हंसी होठों, दिल फिदा है तुम पे मुझे दिल में डूब जाने दो।

इम्तिहान न लो सब्र मेरा बादाखाने में, पी लेना बहुत है पर मुझको चला जाने दो।

एहसान का एहसास मुद्दतों रहेगा जिंदा, तकलीफ लम्हा भर की हो उसे सताने दो।

किस्मत का लिखा किस्मत पे छोड़ दो ‘बांके’, जो मुमकिन लगे उसे अब हो ही जाने दो।

Disclaime

नोट- Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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