बड़ी बोल 

Guest Writer : जीवन है अनमोल, जीना आसान नहीं है, रोग, शोक, वियोग का कैसा दृश्य भयावह, अब धरती पर आना होगा फिर से माधव

Banke Banarasi Pankej

झितीज हो गया तृप्त, सूर्य रश्मि को पाकर, पूर्ण रात्रि था ओढे़ बैठा विश्वास की चादर। संछिप्त में कुछ कह देना प्रमाण नहीं है, यह जीवन है अनमोल, जीना आसान नहीं है, रोग, शोक, वियोग का कैसा दृश्य भयावह, अब धरती पर आना होगा, फिर से माधव, आज जलाशय तृप्त न करते, बाढ़ में बंद हैं, आतताई, निर्लज्ज, पतित, घुमते स्वछंद हैं, तपिश नहीं दिनकर की, प्रदूषित वातावरण है, सत्य कहूं प्रकृति की आभा का ये हरण है।

कोई समझे या न समझे स्वयं सजग हो, वृक्ष लगाओ,सींचो उसको पुर्ण सजग हो, जीवित हो तो परहीत करना कभी न भूलो, अगणित पाप किये छोड़ो, नव संकल्पित होलो, कैसा भी हो भाव भावना उत्तम रखना, जीव-जीव के काम आये ये ही है रचना, प्रफुल्लित हृदय के लिए सूना संसार नहीं है, निश्छल के लिए पग-पग पर मनुहार यहीं है, रामचरित सिखलाता किसी के काम आ जाना, आदर्शों का व्यक्तित्व नई पीढ़ी को सुनाना, धन्य है ‘बांके’ देव भूमि में जन्म पाकर, परहित जहां सिखाती माता पास बिठा कर।

नोट- Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसलाअफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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