बड़ी बोल 

Guest writer : कोई करिश्माई रही होगी जो कुछ पत्थर बन गए होंगे देवता, पहाड़ से टूटा हुआ हर एक पत्थर कोई बेकार थोड़े ही है

हर जितने वाला शख्स सिकंदर या भगवान थोड़े ही है, हिम्मत से लड़ कर हारने वाला शख्स कोई साधारण इंसान थोड़े ही है।

अपने जीत पर तुम गर्व करना पर घमंड नहीं प्यारे, यह जीत किसी के लिए सदा कोई अमर लकीर का निशान थोड़े ही है।

कोई करिश्माई रही होगी जो कुछ पत्थर बन गए होंगे देवता, पहाड़ से टूटा हुआ हर एक पत्थर कोई बेकार थोड़े ही है।

संघर्षों के बदौलत ही तो रस्सी से भी पत्थर पर हो जाते हैं निशान अचूक, कोई गिर गया कभी तो क्या हुआ… वह कोई लंगड़ा, लूला या फिर कोई लाचार थोड़े ही है।

जीत की बुलंदियों पर इठलाना स्वाभाविक है दोस्तों, जितने वाला ही हो सबसे बुद्धिमान…यह इस जहां की असली सच्चाई थोड़े ही है।

यह वक्त ही है जो “सिकंदर” का भी सगा न हो सका साहब, यह तो मामूली सी बस एक मंजिल है… कोई श्रीकृष्ण वाला कुरुक्षेत्र का मैदान थोड़े ही है।

Disclaimer

Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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