बड़ी बोल 

Guest Writer : किससे कहूं किस्से ये खामोश आशिकी के, मेरे दिल को ढूंढते हैं अल्फाज मौसिकी के

आता नहीं अदाओं से दर्द झुठलाना, हम वफा पर जां देंगे आज़मा लेना।

गुस्ताखियों ने तेरी चाहत भी है बढ़ा दी, तुझे पाने की कोशिशें मैंने न की जरा भी, रूठे हो क्यों मुझीसे मुझको नहीं खबर है, लेकिन मिलो जबभी मुझसे मुस्कुरा देना।

एहसास की खातिर जिए हम तो तेरी नजर में, तेरी महक ढूंढा किए सांसों की हर डगर में, हर इत्तेफाक मैंने किस्मत से जोड़ डाला, हाथों की ऐ लकीरों उनसे मिला देना।

किससे कहूं किस्से ये खामोश आशिकी के, मेरे दिल को ढूंढते हैं अल्फाज मौसिकी के, हर आलम ए गुजर में बस तुझको देखता हूं, एक रात ख़्वाब में ही ‘बांके’ बुला लेना।

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