बड़ी बोल 

Guest Writer : क्या जिक्र मैं करूं तेरा चांद चांदनी से, ऐ चांद कशिश़ में तेरी है चांदनी का ही दम

ऐ ख़्वाब मुझको सोने दे रातों को कम से कम, तेरे साथ चल पड़ूंगा उजाले में हर कदम।

ऐसे ना नोच पलके हैं दर्द इनमें काफी, आ घाव दिल के कुछतो मिलकर बांटलें हम।

क्या जिक्र मैं करूं तेरा चांद चांदनी से, ऐ चांद कशिश़ में तेरी है चांदनी का ही दम।

इजाजत ही नहीं है क्या हाल-ए-दिल कहूं , मैं मान कर जी रहा हूं तुझे होश का वहम।

इतना न ठहर मुझमें मुझे इश्क हो ही जाए, ‘बांके’ दे ही डालें किसी लब्ज़ की कसम।

Disclaimer

Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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