मेहमान लेखक 

Guest Writer : रास्ते जिंदगी के आसान कब मिले हैं, बगैर मुश्किलों के मेहरबान कब मिले हैं

Banke Banarasi Pankaj

रास्ते जिंदगी के आसान कब मिले हैं, बगैर मुश्किलों के मेहरबान कब मिले हैं।

हुनरमंद भी गए हैं चंद सिक्कों में तौले, आसानी से तमाशाई को कद्रदान कब मिले हैं।

बुलंद तकदीरे लिए सब पैदा नहीं होते, और मिले बगैर मिट्टी में नबी कब मिले हैं।

हर आजमाइश पर बारीक नज़र रखिए, बगैर मौसमों के फूल कब खिले हैं।

‘बांके’ दुआ करता है वो भी रहे सलामत, जो सरे महफिल भी नज़र अंदाज कर चलें हैं।

Disclaimer

Guest writer कॉलम के जरिए आप भी अपनी बात, शेर-ओ-शायरी, कहानी और रचनाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। ‘आज एक्सप्रेस’ की तरफ से Guest writer द्वारा लिखे गए लेख या रचना में कोई हेरफेर नहीं की जाती। Guest writer कॉलम का उद्देश्य लेखकों की हौसला अफजाई करना है। लेख से किसी जीवित या मृत व्यक्ति का कोई सरोकार नहीं। यह महज लेखक की कल्पना है। Writer की रचना अगर किसी से मेल खाती है तो उसे महज संयोग माना जाएगा।

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