Health Varanasi 

स्वास्थ्य विभाग ने मनाया विश्व तंबाकू निषेध दिवस : जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, नुक्कड़ नाटक के जरिए होने वाले नुकसान को बताया

Varanasi : विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर मंगलवार को राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न जगहों पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। एक ओर जनपद के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जन जागरूकता गतिविधियां की गईं तो वहीं दूसरी ओर पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय पांडेयपुर पर हस्ताक्षर अभियान, विधिक साक्षरता एवं संगोष्ठी का का आयोजन किया गया। इसके साथ ही सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से अस्सी घाट पर नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी के निर्देशन डीडीयू चिकित्सालय के सभागार में जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में जन जागरूकता हस्ताक्षर अभियान, विधिक साक्षरता जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. आर.के. सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमुदलता त्रिपाठ ने किया।

इस मौके पर सभी ने संकल्प लिया कि हम कभी भी धूम्रपान और तम्बाकू उत्पाद का सेवन नहीं करेंगे। हम अपने बच्चों और समाज को तम्बाकू से दूर रखेंगे, समाज को होने वाले क्षति से बचायेंगे। हम तम्बाकू कम्पनियों से किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं लेगे और न ही उन्हें सहयोग करेंगें।

इस दौरान डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि तंबाकू से बने पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक हैं। धूम्रपान करने वाले अपने साथ ही आस-पास रहने वालों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सचिव कुमुदलता त्रिपाठी ने तम्बाकू नियंत्रण अभिनियम 2003 (कोटपा) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तम्बाकू मुक्त समाज का निर्माण करने के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है।

जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के जिला सलाहकार डॉ. सौरभ प्रताप सिंह ने कहा कि सेकंड हैण्ड स्मोकिंग का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चों और गर्भवती पर होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु की वजह सेकंड हैण्ड स्मोकिंग है।

संगोष्ठी में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके यादव, सामाजिक कार्यकर्ता संगीता सिंह, साईकोलोजिस्ट अजय श्रीवास्तव, एलटी गौरव सिंह, सतीश कुमार, अन्य चिकित्सक, अधिकारी और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

नुक्कड़ नाटक के जरिये

स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में सेंटर फॉर एडवोकेसी एण्ड रिसर्च (सीफार) संस्था के सहयोग से अस्सी घाट पर नुक्कड नाटक शीर्षक ‘कहे फकीरा’ के जरिए लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले खतरों के प्रति आगाह किया गया। लोगों को धूम्रपान से होने वाली गंभीर बीमारियों के बारे में आगाह करते हुए इस लत से तौबा करने का संदेश भी दिया। इसके साथ ही सलाह दी गई कि यदि स्वस्थ जीवन चाहिए तो हर हाल में धूम्रपान से बचना होगा। नुक्कड़ नाटक देखने के लिए अस्सी घाट पर जुटी भीड़ ने मंच दूतम के कलाकारों की इस शानदार प्रस्तुति को काफी सराहा।

क्या है कोटपा अधिनियम

-तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 का पालन करें या जुर्माने अथवा दण्ड (जिसमें अर्थदण्ड अथवा कारावास) का सामना करें।
-धारा-4 के अर्न्तगत सार्वजनिक स्थान (जैसे सभागृह, अस्पताल, भवन, रेलवेस्टेशन प्रतीक्षालय, मनोरंजन केन्द्र, रेस्टोरेन्ट, शासकीय कार्यालयों, न्यायालय परिसर, शिक्षण संस्थानो, पुस्तकालय, लोक परिवहन) और अन्य कार्यस्थलों में धूम्रपान करना अपराध है।
-धारा-5 के अर्न्तगत तम्बाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबन्ध है।
-धारा-6 (अ) के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को-के द्वारा तम्बाकू बेचना प्रतिबन्धित।
-धारा-6 (ब) के अर्न्तगत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज परिधि में तम्बाकू बेचना प्रतिबंधित है।
-धारा-7 के अर्न्तगत तम्बाकू तम्बाकू उत्पादों पर चित्रमय स्वास्थ्य चेतावनी प्रदर्शित होनी चाहिए।
-धारा 21 व 24 के अर्न्तगत धारा 4, 6 का पालन न करने पर 200 रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

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