Health Varanasi 

टूट गयी थी आस, आयुष्मान कार्ड ने दिया साथ : कुल्हे का प्रत्यारोपण तो हुआ ही गृहस्थी भी बर्बाद होने से बची, जानिए इनकी आपबीती

Varanasi : दोनों कुल्हे के जवाब देने के साथ ही अचानक आयी मुसीबत से उन्हें अपनी जिंदगी की आस भी खत्म होती नजर आ रही थी। एक तो बुढापा दूसरे बीमारी से शरीर की हालत भी ऐसी हो गयी थी कि बिना सहारा चार कदम भी चलना मुश्किल था। लगता था कि जब तक सांस चलेगी, तब तक इस लाचारी को झेलना ही पड़ेगा।

पास में जमा-पूंजी भी इतनी नहीं थी कि वह इतना महंगा उपचार कराकर अपने कुल्हे का प्रत्यारोपण करा सकें। कहीं से आर्थिक मदद की भी उम्मीद नहीं थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में साथ दिया ‘आयुष्मान कार्ड’ ने। यह कहना है जिले में आयुष्मान कार्ड योजना के एक लाखवें लाभार्थी बने गौरीशंकर गुप्त का।

आयुष्मान कार्ड के जरिये संकट से उबरने की कहानी बयां करते हुए बुजुर्ग गौरीशंकर गुप्त की आंखों से आंसू छलक उठते है। पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के आयुष्मान वार्ड में भर्ती गौरीशंकर बताते हैं कि एक फर्म में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करते हुए वह अपनी गृहस्थी की गाड़ी किसी तरह खींच रहे थे। परिवार में आर्थिक तंगी जरूर थी पर सब खुशहाल थे।

दो बेटियों सपना और निशा का वह विवाह भी कर चुके है, जबकि एक और बेटी एकता की शादी करनी शेष है। इकलौते बेटे आकाश को वह पढ़ा रहे थे ताकि अपने पैरों पर खड़ा होकर भविष्य में परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल सके। सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। तभी उनके कुल्हे के खराब होने से उनकी जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया जिसने उनके सारे सपने को तोड़ दिया। नौकरी छूटी तो परिवार का आर्थिक संकट से उबारना मुश्किल नजर आने लगा।

ऐसे में अपना कुल्हा प्रत्यारोपण कराने के मंहगे इलाज के बारे में भला कैसे उम्मीद करते। इस मुसीबत में जब सब तरफ से रास्ते बंद नजर आये तभी उन्हें एक दिन अचानक आयुष्मान कार्ड का ख्याल आया। फिर तो उन्हें लगा कि यह कार्ड उन्हें सभी मुसीबतों से छुटकारा दिला देगा। मुफ्त में उनका उपचार तो होगा ही ठीक होने के बाद वह फिर से अपनी जिंदगी अच्छी तरह से जी सकेंगे और कामधाम कर पुनः गृहस्थी भी चला सकेंगे।

गौरीशंकर बताते हैं उनके दोनों कुल्हों के प्रत्यारोपण के बाद उन्हें अपना सपना सच होता नजर आ रहा है। वह कहते हैं कि आयुष्मान कार्ड योजना की जितनी भी सराहना की जाए कम है क्योंकि यह न सिर्फ हम जैसे गरीबों का मुफ्त में उपचार करा रहा है बल्कि उनकी गृहस्थी बर्बाद होने से भी बचा रहा है। अस्पताल से छुट्टी पाकर वह एक बार फिर नये सिरे से जिंदगी शुरू करेंगे। बेटे को पढाएंगे, सबसे छोटी बेटी की शादी करेंगे और शेष जिंदगी खुशियों के साथ गुजारेंगे।

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