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सावन में श्रद्धालुओं का इजाफा, कारोबारियों का बढ़ा मुनाफा : श्रद्धालुओं की भीड़ से व्यापारियों का बढ़ा कारोबार, अबतक 27 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी

श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद से ही बनारस के कारोबार और पर्यटन उद्योग को लगा पंख

सावन में सोने पर सुहागा

Varanasi : सावन में काशी नगरी में हर इंसान बम भोले बम बोलता और झूमता नजर आ रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में इस बार कॉरिडोर बनने के बाद से मंदिर के आस-पास की दुकानों की बिक्री के मामले में खूब चांदी हुई है। फूल-माला वाले से लेकर प्रसाद और दूध तक कि बिक्री में लाखों का मुनाफा दर्ज किया जा रहा है। सिर्फ एक सोमवार को ही लगभग 70 से 75 लाख की बिक्री हुई है। इसी से समझा जा सकता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के आस-पास के स्थानीय दुकानदारों की कितनी कमाई हुई है। काशी विश्वनाथ व्यापार मंडल उपाध्यक्ष भानु मिश्रा का कहना है कि बाबा विश्वनाथ को दूध चढ़ाने की जो परम्परा है। उसकी वजह से दूध में अमूल और गोल्ड खूब बिका। एक लीटर का पैकेट लेकर उसको लोग 5 लीटर का बनाते हैं और बाबा को चढ़ाते हैं। कुछ नहीं तो 15 से 20 लाख रुपये का तो सिर्फ दूध बिक गया है। यदि एक-एक श्रद्धालु भी मात्र 100 रुपये का प्रसाद चढ़ाए होंगे तो भी 5 लाख लोग यदि आये हैं तो इस हिसाब से 50 लाख का मुनाफा हो गया। इस मुनाफे को तेज गति देने का काम किया है। श्रद्धालुओं के सामान रखने के लिये नगर निगम ने दशाश्वमेध और सिंधी धर्मशाला में उचित व्यवस्था की थी। मगर दोनों जगह पर्याप्त जगह न मिल पाने के कारण श्रद्धालुओं के पास फूल-माला की दुकान पर सामान रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

बिचौलियों की भी मौज

ऐसे में जबतक किसी दुकान वाले के यहां फूल-माला व प्रसाद न लिया जाए तबतक वह सामान रखने के लिए लॉकर देगा ही नहीं। यह भी बड़ा कारण रहा मुनाफे का। यहां तक कि कपड़े के दुकानदारों ने भी अपनी दुकान बंद कर फूल-माला-प्रसाद की दुकान खोल ली है। यही कारण है कि ज्ञानवापी-चौक क्षेत्र में माला-फूल की दुकानों की संख्या बढ़ गई है। यहां लगभग 600 अस्थायी दुकानें व 450 स्थायी दुकानें है। सिर्फ 15 से 20 लाख का लायी, चूड़ा, रेवड़ी ही प्रसाद के नाम पर बिक गया है। इसमें सबसे ज्यादा चांदी बिचौलियों की रही जो कि दर्शन कराने के नाम पर कमीशन ले रहे हैं। ये दर्शन-पूजन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से कुछ पैसे लेते हैं।

अबतक 27 लाख से ज्यादा ने लगाई हाजिरी

सावन महीने के बीते 13 दिन में वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के धाम में 27 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हाजिरी लगा चुके हैं। सावन के पहले सोमवार को जहां 5 लाख से ज्यादा शिव भक्त बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे थे। दूसरे सोमवार को 6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया था। इसके अलावा सामान्य दिनों में रोजाना औसतन डेढ़ लाख से 3 लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आ रहे हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार अब तक सावन में इतने श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दरबार में कभी नहीं आए थे।

हर कोई देखना चाहता है बाबा का भव्य धाम

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ सुनील कुमार वर्मा ने कहा की काशीपुराधिपति के नव्य-भव्य धाम को हर कोई देखना चाहता है। 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल से ज्यादा वाले विश्वनाथ धाम में इस बार दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को धक्का-मुक्की भी नहीं करनी पड़ रही है। दर्शन के बाद श्रद्धालु विश्वनाथ धाम की भव्यता देखने के बाद ही वापस जा रहे हैं। पूरा प्रयास किया गया है कि श्रद्धालुओं को धूप न लगे। उन्हें पीने के पानी की दिक्कत न हो। सामान रखने में सहूलियत हो। उन्हें गर्मी से निजात दिलाने के लिए कूलर-पंखे भी लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं की मदद के लिए पुलिस-प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के अलावा वॉलंटियर्स की भी टीम लगाई गई है।

श्रद्धालुओं का हुजूम सबके लिए फायदेमंद

टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता और महानगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रेम मिश्रा ने कहा की बनारस में श्रद्धालुओं का आना सभी के लिए फायदेमंद है। ऑटो-नाव संचालक, ट्रैवल्स एजेंसियां, होटल-रेस्टोरेंट, पूजा-पाठ की सामग्रियां बेचने वाले और बनारसी साड़ियों के विक्रेताओं से लगा कर ऐसे सभी वर्गों को फायदा मिल रहा है। 13 दिसंबर 2021 को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद बनारस के कारोबार और पर्यटन उद्योग बढ़ रहा है।

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