Varanasi उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म 

जीवित्पुत्रिका व्रत : पुत्र दीर्घायु कामना के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत, लक्ष्मीकुंड स्थित माता लक्ष्मी के दर्शन को उमड़ी भीड़

Varanasi : आश्विन कृष्ण अष्टमी, बुधवार को संतानों की रक्षा का व्रत जीवित्पुत्रिका श्रद्धा से मनाया गया। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और सूर्यास्त से पूर्व पूजन-अर्चन कर संतान की लंबी उम्र की कामना की।जीवित्पुत्रिका को जिउतिया भी कहते हैं। सुबह महिलाओं ने व्रत संकल्प लेकर पूजन-प्रसाद की तैयारी की। बनारस के गंगा घाटों और कुंडों पर पहुंचीं महिलाओं ने भगवान जिउतवाहन की विधि-विधान से पूजा की और अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।

इसी के साथ ही लक्सा लक्ष्मी कुंड स्थित माता लक्ष्मी के सोरहिया दर्शन का भी समापन हुआ। हालांकि कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष भी मेला स्थगित रहा। पर्व पर लक्ष्मी कुंड स्थित मां लक्ष्मी मंदिर में व्रती माताओं और श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। आखिरी दिन मंदिर परिसर और आस-पास स्थित विष्णु व शनिदेव मंदिर सहित प्राचीन काली मां मंदिरों में भी दर्शनार्थियों ने दर्शन पूजन किया। कुंड के आस-पास अस्थाई दुकानें लगाई गई थीं।

सुरक्षा को देखते हुए पुलिस बल तैनात रही। महिलाओं ने थाली में अक्षत, रोली, जिउतिया सूत्र, फल-फूल, मिष्ठान, सुपारी सजाकर जिउतिया माता, महालक्ष्मी और भगवान नारायण को अर्पित कर विधिविधान से आरती, पूजन किया। जीवित्पुत्रिका व्रत कथा का श्रवण किया। पूजन के बाद महिलाओं ने सन्तानों के गले में जिउतिया पहनाकर दीर्घायु की कामना की। व्रत का पालन करते हुए गुरुवार को सूर्योदय के बाद महिलाएं पारण करेंगी और प्रसाद वितरित करेंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूजन की धूम

ग्रामीण क्षेत्रों में पुत्र की लंबी उम्र के लिए माताओं ने व्रत रहकर पूजा की। दानगंज के नियार, सुल्तानीपुर, हाजीपुर, अजगरा में धूमधाम से पर्व मना। लोहता के सुरही, बनकट, कोरौताबाजार, बखरिया, केराकतपुर में मंदिर और तालाबों पर पूजा की गई। कछवारोड स्थित बम भोले शिव मंदिर के मैदान में महिलाओं ने की पूजा-अर्चना की। राजातालाब जक्खिनी, भवानीपुर, मातल देई दीपा पुर,भीम चंडी, महागांव, कृष्णदत्पूर, जयापुर, चंदापुर, राजातलाब, रानी बाजार, कचनार बीरभानपुर, आदि गांव में महिलाएं समूह में पूजा की। रोहनिया प्राचीन शिव धाम मंदिर दरेखू, बाणासुर मंदिर नरउर शूलटंकेश्वर, महादेव मंदिर माधोपुर में पूजन-अर्चन किया गया। बड़ागांव क्षेत्र में देवस्थलों पर मंगलगीत गाती हुईं महिलाएं पहुंची। 

माता लक्ष्मी के दर्शन को उमड़ी भीड़

लक्ष्मी कुंड पर व्रती महिलाएं उमड़ी हैं। सभी आज के दिन धन-धन्य, सुख-वैभव और संतान का सुख प्राप्त करने को संतान लक्ष्मी की दुर्लभ मूर्ती का दर्शन करने पहुँच रही हैं। यह मूर्ती साल में सिर्फ एक दिन जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन दर्शन के लिए सुलभ होती है। महालक्ष्मी मंदिर के उपमहान्त अवधेश पांडेय ने बताया कि ये श्री शक्तिपीठ महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली का प्राचीन मंदिर है। आज संतान लक्ष्मी जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष पूजन होता है जिसमें व्रती महिलाएं निराजल होकर भगवती को 16 गांठ का धागा चढ़कर कथा सुनती हैं और शाम को व्रत का पारण करती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जो भी महिला पूरी श्रद्धा के साथ जीवीतपुत्रिका का व्रत रखती है उसे धन-धन्य, सुख-वैभव और संतान का सुख प्राप्त होता है। साल में जीवित्पुत्रिका के दिन संतान लक्ष्मी का विशेष पूजन होता है। संतान लक्ष्मी की पूजा का जिउतिया व्रत के दिन विशेष महत्त्व है। साल में आज के दिन भगवती संतान लक्ष्मी का दिव्य और भव्य श्रृंगार होता है। इनका दर्शन साल में सिर्फ एक दिन आज के ही दिन सुलभ होता है।

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