Varanasi धर्म-कर्म 

पारंपरिक अनुष्ठान : आदिदेव की नगरी में आदिशक्ति की भक्ति

Varanasi : आदि देव भगवान शंकर की नगरी काशी में आदिशक्ति की भक्ति का सुरूर चढ़ा तो हर कोई उसी में डूबता नजर आया। शहर की चहुं दिशा में सिर्फ और सिर्फ जगत जननी की धूम, पूरा शहर मानों धूप, दीप के महमह हो उठा। चारों तरफ लोहबान, कपूर, धूप की गमक। माता रानी के गीत, भजन। ये ही तो है काशी की विशेषता। शैलपुत्री से लेकर कूष्मांडा, कामाख्या से लेकर महागौरी, महा लक्ष्मी से लगायत महाकाली के मंदिर तक जहां जाएं जिस गली में जिस चौराहे से गुजरें बर माता की धूम। मंदिरों में देवी का दरबार सजे और नवरात्रि में घरों में देवी मंत्र न गूंजे ऐसा कहीं हो सकता है।

भले ही देश कोरोना महामारी से परेशान है पर शनिवार से शारदीय नवरात्र शुरू होते ही शुभ मुहूर्त में दुर्गा सप्तसति के ओजस्वी मंत्रों के बिच कलश स्थापना हुई। घरो, प्रतिष्ठानों, दुकानों सहित अन्य स्थानों पर कलश स्थापना के बाद अनुष्ठानों का दौर चला। देवी दरबारों में दर्शन के लिए भक्तो की भीड़ उमड़ी रही। कोविड बचाव को ध्यान में रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भक्त माता का दर्शन कर रहे है।

इससे पूर्व शुक्रवार को चुनरी, मेवा, फल, मिष्ठान, माला फुल, नारियल, सोपड़ी, रोली, अच्छत, इत्र, गुलाबजल की जम कर खरीददारी हुई। महामारी के ऊपर आस्था भारी दिखी। पर्व के उल्लास में भक्त किसी भी चीज की पूजन में कमी नही करना चाह रहे थे। तैयारियां पूरी हुईं तो ब्राह्मणों से बात कर शुभ मुहूर्त की जानकारी ली। नौ दिवसीय नवरात्र के पहले दिन पारंपरिक अनुष्ठान की शुरुआत की विद्वानों ने मंत्रों से आदिशक्ति का आवाहन किया। अश्विन शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर कलश स्थापना कर भक्तों ने समृद्वि की कामना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हुआ तो कहीं अखंड ज्योत जलाकर नौ दिन तक मां भगवती की आराधना होगी। 

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