Varanasi धर्म-कर्म 

रुद्र जप अनुष्ठान के साथ काशी कांची महोत्सव का समापन : आयोजक बोले- संस्कार निर्माण के लिए कांचीपीठ की ओर से जारी रहेगी ऐसे आयोजनों की श्रृंखला

Varanasi : काशी कांची महोत्सव का पूर्णाहुति श्रीकाशी कामकोठीश्वर मंदिर में कांची से पधारे 108 वैदिक बटुकों द्वारा माहरुद्र जप और अभिषेक के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ।

महोत्सव के समापन अवसर पर नवदुर्गा-नवगौरी का पूजन सुहागिन और कन्यापूजन के साथ संपन्न हुआ। गिरिजा-पार्वती के रूप में नवविवाहित जोड़ो का पूजन कर आने वाले नव संवत्सर के स्वागत, नवसंवत्सर में सुख, शांति समृद्धि और ऐश्वर्य का कारक बने, ऐसी कामना की गई।

महारुद्र के अवसर पर संयोजक वी.एस. सुब्रमण्यम मणि ने पूरे कार्यक्रम का विस्तृत विवरण बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम हमारे सनातन संस्कृति संस्कार को अक्षुण्ण बनाये रखने का एक शुभ प्रयास है।

प्रत्येक माता-पिता का दायित्व है कि अपने बच्चों को संस्कारित करते हुए हमारे प्राचीन परंपराओं का बोध कराना परम आवश्यक है।

इसीलिए शंकराचार्य शंकर वीजेंद्र सरस्वती द्वारा देश के अनेक भागों में संस्कृति धाम के माध्यम से बच्चों में संस्कार, संस्कृति का बोध कराया जा रहा है।

पूरे देश में इस प्रकार के संस्कार शाला 150 से अधिक है। शंकराचार्य के निर्देशन में वेद पाठशालाओं तथा नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में तथा पराविद्या अपराविद्या दोनों के लिए अनेक कार्य किये जा रहे हैं।

आने वाले नव संवत्सर में काशी में शंकरा आई हॉस्पिटल प्रारंभ किया जा रहा है। इस समय देश के 18 राज्यों में पीठ द्वारा नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन वी.एस. चंद्रशेखर ने किया।

धन्यवाद और आभार ज्ञापन संपत गुरु ने किया। कार्यक्रम के अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम को अगले वर्ष के लिए पुनः आयोजित करने की कामना के साथ समाप्त किया।

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