Varanasi काशी-तमिल समागमम् 2022 

काशी तमिल संगमम : सांस्कृतिक संध्या में शामिल हुईं तेलंगाना की गवर्नर डॉ. तमिलसाई सौंदरराजन

Varanasi : बीएचयू के एम्फीथिएटर मुक्ताकाशी प्रांगण में निर्मित भव्य सभामंडप में आयोजित काशी तमिल संगमम महोत्सव में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र संस्कृति मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में तमिलनाडु से पधारे गुणी अतिथि कलाकारों के समूह द्वारा गायन वादन, नृत्य की मनोहारी और प्रभावशाली प्रस्तुति की गई।

सांस्कृतिक संध्या की मुख्य अतिथि तेलंगाना की गवर्नर और पुद्दुचेरी की लेफ्टिनेंट गवर्नर डॉ. तमिलसाई सौंदरराजन व उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर थे।

सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत बीएचयू के संगीत विभाग सहायक आचार्य डा. ज्ञानेश चन्द्र पाण्डेय भगवान शिव के भजन जय जय शिव शंकर से हुई। उन्होंने अपनी दूसरी प्रस्तुति में हिन्दी गम्मत भजन सहजनवा तू का जानो प्रीत से सांस्कृतिक संध्या को आनंदित बना दिया। अपने तीसरी प्रस्तुति में कजरी गीत का गायन किया। मीरजापुर कइला गुलजार हो, कचौड़ी गली सुन कइला बलमू इस प्रस्तुति पर श्रोता झूम उठे।

शाम की दूसरी प्रस्तुति बीएचयू के युवा छात्र बागीश पाठक ने अपने प्रथम मंगल गीत हेरी सखी मंगल गाओ री भजन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने दूसरी गीत की प्रस्तुति किसके उसके मंजिल का पता पाया नहीं जाता तीसरे प्रस्तुति में सूफी भजन सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आएं हैं इस प्रस्तुति के बाद पूरा सभागार तालियों की ध्वनि से गूंज उठा।

कार्यक्रम की तृतीय प्रस्तुति में तमिलनाडु के लोक गीत और लोक नृत्य का मंचन एस. ज़ेविओट जयकुमार कराकुड ने नमस्ते काशी, हर हर महादेव के जयकारों के साथ शुरू किया। तमिलनाडु के प्रसिद्ध लोक गीतों की प्रस्तुति दी गयी। जिसमें मां दुर्गा के रौद्र रूप और बाल कलाकार द्वारा विशेष लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। उत्तर और दक्षिण के सांस्कृतिक का आदान प्रदान हुआ। इस प्रस्तुति में जयकुमार के टीम द्वारा कुरूम्बस आदिवासी नृत्य के रूप में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कला की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने पंडाल में मौजूद सभी दर्शकों को उत्साह से भर दिया।

कार्यक्रम की चतुर्थ प्रस्तुति तमिलनाडु से मुत्तु चंद्रन त्ववाली के नेतृत्व में (तोलपावा कुथु) रामायण पर आधारित कठपुतली नृत्य के माध्यम से राम लक्ष्मण और हनुमान के चरित्र का मंचन किया गया। कठपुतली नृत्य दक्षिण भारत सभ्यता में देख दर्शक दीर्घा में बैठे मेहमान भावविभोर हो गये। कार्यक्रम की चौथी प्रस्तुति कलईमामणि प्रिया मुरली के नेतृत्व में भरत नाट्यम की दी गयी। बीएचयू के प्रांगण में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

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