Varanasi 

BLW के स्थापना दिवस पर कवि सम्मेलन : 66 साल की उपलब्धि गिनाई, कवियों ने श्रोताओं को मुग्ध किया

Varanasi : बनारस रेल इंजन कारखाना के स्थापना दिवस पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन रंगशाला के मंच पर किया गया। मुख्य अतिथि सुनील कुमार मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (एस.ई ) थे। कार्यक्रम के प्रारम्भ मे दीप प्रज्जवलन व सरस्वती जी के फोटो पर माल्यार्पण करके किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि बरेका की स्थापना 23 अप्रैल 1956 को हुई थी। बरेका का स्थापना दिवस संस्थान बरेका द्वारा सांस्कृतिक संध्या व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन द्वारा मनाया जा रहा है जो बहुत ही सराहनीय है।

आज बरेका को स्थापित हुये 66 वर्ष हो गए है। इस दौरान बरेका नये-नये आयाम व कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उसी प्रकार बरेका कर्मचारियो व उनके आश्रितों के लिए संस्थान बरेका विभिन्न गतिविधिया जो सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक व खेलकूद को संचालित कर रहा है जिससे बरेका का नाम गौरवान्वित हो रहा है। संस्थान द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जितनी सराहना की जाए वह कम है क्योंकि संस्थान की विभिन्न खेलो कि टीमों मे खेल रहे कई खिलाड़ी आज राष्ट्रीय व प्रदेश की टीमों मे खेल रहे है जिससे उनकी प्रतिभा को तो सम्मान मिला ही है साथ ही बरेका का भी नाम प्रकाशमान हो रहा है।

कहा, संस्थान द्वारा बरेका के स्थापना दिवस पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कराने के लिए प्रशंसा करता हूं। कविता एक ऐसा माध्यम है जो हमको समाज मे हो रहे कार्य कलापों, घटनाओं इत्यादि के बारे मे प्रभावी ढंग से अवगत कराता है। मैं आप सभी को बरेका के स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं।

इसके बाद कवि सम्मेलन के पूर्व क्रेजी एबाउट डांस एकेडमी के प्रशिक्षक द्वारा सुमधुर गिटार वादन से ऐसा भक्ति राग छेड़ा की वातावरण भक्तिमय हो गया। कवि सम्मेलन में मुंबई के दुर्गेश दूबे ने अपनी रचनाओं से ऐसा शमा बांधा की श्रोताओं द्वारा बार-बार कविता पाठ की मांग होती रही, उनकी पिता पर पढ़ी गई रचना ने दर्शकों के आंखो मे अश्रु ला दिए।

लखनऊ से आए कवि ललित दीपक ने अपनी रचनाओं से लोगो मे देश-भक्ति की भावना को जागृत कर दिया। करुणा सिंह ने अपनी श्रृंगार की रचनाओं से लोगों को सराबोर कर दिया। नसीमा निशा ने अपने बेहतरीन गजलों से लोगो को मंत्रमुग्ध कर दिया। ओमप्रकाश चंचल ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को कुर्सी से उठाकर ताली बजाने को मजबूर कर दिया।

विकाश विदिप्त ने अपनी रचना काशी से पूरे काशी का परिचय अपने अंदाज में दिया। आजमगढ के कवि दान बहादुर सिंह ने अपनी रचनाओं से लोगों को मोहित कर दिया। एखलाक भारतीय ने अपनी कविता मैं तो हिंदुस्तान कहूंगा से लोगों को देश के प्रति सोचने को मजबूर कर दिया।

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