Varanasi 

संचार-क्रांति, सूचना-प्रौद्योगिकी और नवाचार की भाषा : हिंदी रच रही नए आयाम- पोस्टमास्टर जनरल

Varanasi : हिन्दी सिर्फ साहित्य ही नहीं बल्कि विज्ञान से लेकर संचार-क्रांति, सूचना-प्रौद्योगिकी और नवाचार की भाषा भी है। हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है, ऐसे में इसके विकास के लिए जरुरी है कि हम हिंदी भाषा को व्यवहारिक क्रियाकलापों के साथ-साथ राजकीय कार्य में भी प्राथमिकता दें।

सृजन व अभिव्यक्ति की दृष्टि से हिंदी दुनिया की अग्रणी भाषाओं में से एक है। हिन्दी अपनी सरलता, सुबोधता, वैज्ञानिकता के कारण ही आज विश्व में दूसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है।

क्षेत्रीय डाक कार्यालय में 28 सितंबर को आयोजित हिंदी कार्यशाला और सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने व्यक्त किये।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर सत्यपाल शर्मा और कवि दान बहादुर सिंह संग उन्होंने पखवाड़ा के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के विजेताओं को सम्मानित भी किया।

बतौर मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर सत्यपाल शर्मा ने कहा कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी ने संपर्क भाषा और राष्ट्रभाषा के रूप में राष्ट्रीय एकता की निर्मिति में ऐतिहासिक योगदान दिया।

आजादी के बाद संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। राजभाषा के रूप में हिंदी के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए हैं।

बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप राजभाषा, संपर्क भाषा और महत्वपूर्ण ज्ञानभाषा बने रहने के लिए हिंदी को तकनीकी रूप से और समृद्ध बनना होगा। हिंदी की सबसे बड़ी ताकत उसके बोलने वालों की बड़ी संख्या है।

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