Breaking Varanasi उत्तर प्रदेश ऑन द स्पॉट धर्म-कर्म पूर्वांचल 

प्रभु श्रीराम की लीला : शिव धनुष टूटते ही चहुंओर जय-जयकार, गुस्से से तपते हुए भगवान परशुराम का आगमन, संवाद और आरती

Sanjay Pandey

Varanasi : श्रीराम शिव धनुष तोड़ पायेंगे या नहीं? समूचा जनकपुर संशय में था जब एक से एक राजा यहां तक कि रावण भी धनुष हिला नहीं सका तब राजा जनक सहित सभी लोग घबरा गये। लेकिन श्रीराम के छूते ही धनुष टूट गया। फिर तो चहुंओर जय-जयकार गूंजने लगी।

रामनगर की रामलीला के पांचवें दिन लीला में धनुष यज्ञ और परशुराम संवाद का मंचन किया गया। मंगलवार को रामलीला के प्रसंग में राजा जनक सतानंद से ऋषि विश्वामित्र को श्रीराम-लक्ष्मण सहित रंगभूमि में आमंत्रित करने को कहते हैं। इसके बाद सभी राजा अपने बल पौरुष का प्रदर्शन करते हैं लेकिन धनुष तोड़ना तो दूर हिला भी नहीं पाते हैं।

तब राजा जनक क्रोध में आकर कहते हैं कि अगर मैं जानता यह धरती वीरों से खाली है तो मैं ऐसी प्रतिज्ञा ही नहीं करता। इस पर लक्ष्मण आवेश में आ जाते हैं और कहते हैं अगर प्रभु की आज्ञा मिले तो मैं इस ब्रह्मांड को गेंद सा उठा लूं और कच्चे घड़े की तरह फोंड़ दूं।

तब विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम और तोप की गर्जना के साथ धनुष तोड़ देते हैं। सीताजी श्रीराम के गले में जयमाल डाल देती हैं। इसी बीच गुस्से से तपते हुए परशुराम का आगमन होता है । शिव का टूटा धनुष देख वह क्रोधित हो उठते हैं। सभा में आये सभी राजा भाग जाते हैं। परशुराम कहते हैं कि जिसने धनुष तोड़ा है वह सामने आये वर्ना धोखे में सभी मारे जाएंगे।

इस पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच देर तक विवाद होता है। श्रीराम दखल करते हुए परशुराम के गुस्से को शांत करते हैं। राजा जनक विश्वामित्र की सलाह पर महाराज दशरथ को यह खुशखबरी देने के लिए दूत भेजते हैं। साथ ही नगर और मंडप आदि सजाने का आदेश देते हैं, यही पर आज की आरती होती है। 

You cannot copy content of this page