Breaking Varanasi धर्म-कर्म पूर्वांचल 

कथा का 9वां दिन : समापन पर प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की भीड़, आशुतोषानंद ने बताया- एक लोटा दूध मांग रहे उपमन्यु को महादेव ने दिया क्षीरसागर

Varanasi : भगवान शंकर आपकी हर बात को सुनते हैं, परंतु आपको एकनिष्ठ होना पड़ेगा जिसे सबका भरोसा होता है। संकट के समय जिसका कोई सहायक नहीं होता, परंतु जिसे केवल महादेव का भरोसा होता है, उसका हर काम सफल होता है।

चौबेपुर के सोनबरसा में चल रहे शिव महापुराण और रूद्र चंडी महायज्ञ में स्वामी आशुतोषानंद गिरी ने धौम्य ऋषि के पुत्र उपमन्यु के प्रसंग में बताया कि उनकी साधना के समय स्वयं इंद्र प्रसन्न होकर वरदान देने आए। बहुत आग्रह किया, परंतु शिवजी में अटूट निष्ठा के कारण उपमन्यु ने इंद्र के वरदान को ठुकरा दिया।

इंद्र क्रोधित होकर जान से मारने की धमकी देने लगे, परंतु उपमन्यु डरे नहीं। छोटे से बालक होने पर भी पत्थर लेकर इंद्र के तरफ दौड़ पड़े। इस प्रकार की निष्ठा देखकर उसी समय भगवान शंकर जी प्रकट हो गए। प्रसन्नता पूर्वक क्षीरसागर का स्वामी बना दिया।

शैवसंप्रदाय का आचार्य बनाया। यस इतना फैला की कभी श्रीकृष्ण भगवान भी संतान प्राप्ति की कामना से शिव मंत्र की दीक्षा लेकर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किए।

शंकर जी इतने महान हैं कि एक लोटा दूध की इच्छा से तपस्या करने आए उपमन्यु को छीर सागर ही प्रदान कर दिया। शिव महापुराण के विश्राम दिवस पर महामंडलेश्वर ने बताया कि शिव महापुराण के वक्ता-श्रोता तथा रुद्राक्ष पहनने वाले सभी लोग शिव लोक प्राप्त करते हैं।

प्रयाग के त्रिवेणी संगम पर यज्ञ कर रहे सभी ऋषियों को काशी पहुंचने पर भगवान विश्वनाथ के दर्शन हुए। नंदीश्वर के साथ ब्रह्मलोक गए। वहां ब्रह्म सरोवर में स्नान कर सभी शिव लोक पहुंच गए।

शिव महापुराण कथा और रूद्र चंडी महायज्ञ के विश्राम पर कार्यक्रम के संयोजक पवन चौबे ने बताया कि पूरे क्षेत्र के लोगों की निष्ठा और भक्ति रस में कथा विश्राम के आखरी दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुगणों ने भगवान के महाप्रसाद को ग्रहण किया।

You cannot copy content of this page