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टूटने जा रहा आध्यात्मिक सन्नाटा : दो साल बाद इस बार रामनगर में विराजेंगे प्रभु श्रीराम, कोरोना के चलते दो साल से नहीं हो रही थी रामलीला

Sanjay Pandey

Varanasi : रामनगर का धार्मिक और आध्यात्मिक सन्नाटा टूटने जा रहा है। इस बार रामलीला होगी। दो साल बाद रामनगर में साक्षात प्रभु श्रीराम विराजेंगे और पूरे एक महीने तक लोगों को अपनी विशिष्ट लीला के मोहपाश में बांधेंगे। बस नौ सितंबर का इंतजार करिए। अनंत चतुर्दशी की यह शाम आपको त्रेता युग के फिर से लौटने का एहसास कराएगी।

इस दिन से रामलीला शुरू होगी। भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी की चौपाई गूंजेगी। हे…. हा….. की लयबद्ध स्वर लहरियां पूरे एक महीने तक आपको अयोध्या से लेकर लंका तक सुनाई देगी। दरअसल, बीते दो साल से न रामलीला हो रही है और न ही चौपाइयों के स्वर गूंज रहे थे। एक सांस्कृतिक बियाबान सा पसरा हुआ था। लेकिन अब दुख भरे दिन बीतने को हैं। इस बार रामनगर में प्रभु श्रीराम विराजेंगे। रामलीला होगी। रामनगर किले से इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो रामलीला होगी।

सूत्र बताते हैं कि कुंवर अनंत नारायण सिंह ने कुछ दिन पहले रामलीला व्यास को किले में बुलाया था। मुख्य स्वरूपों की भूमिका निभाने के लिए बालकों की तलाश करने को कहा था। रामनगर रामलीला की सबसे पहली प्रक्रिया यही है। चूंकि मुख्य स्वरूपों श्रीराम, सीता, भरत, लक्ष्मण और शत्रुध्न की भूमिका 15 साल तक के बच्चे ही निभाते हैं इसलिए हर साल बच्चों का चयन किया जाता है। किले में स्वर परीक्षा के बाद कुंवर अनंत नारायण सिंह इनके चयन पर अंतिम मुहर लगाते हैं। कोरोना के चलते बीते दोनों साल यह आरंभिक प्रक्रिया ही नहीं अपनाई गई थी। बाद में रामलीला हुई भी नहीं। लेकिन इस साल इस प्रक्रिया के संकेत मिलने के बाद स्पष्ट हो चला है कि इस साल रामलीला होगी।

बशर्ते कि फिर कोरोना की कोई लहर न आये और सार्वजनिक आयोजनों पर प्रतिबंध न लगे। वैसे दो साल से रामलीला के साजो-सामान से भरे गोदाम भी बंद पड़े हैं। सूत्र बताते हैं कि दो साल में कई सामान खराब भी हो गए हैं। लेकिन रामलीला आयोजन में यह कोई बाधा नहीं मानी जा रही है। बता दें कि पिछले दो साल से रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला नहीं हो रही है। जनकपुर मंदिर में पूरे महीने रामायण पाठ करा कर आरती कराई जाती थी। राज परिवार इसमें शामिल होता था। सैकड़ों की संख्या में रामलीला प्रेमी भी प्रतिदिन यहां हाजिरी लगाने आते थे। हालांकि, रामलीला न होने से उपजी निराशा लोगों के चेहरों पर साफ देखी जाती थी। लेकिन इस बार कोरोना की लहर नहीं चल रही है। ऐसे में इस बात को लेकर बहुत चर्चाएं चल रही थीं कि रामलीला होगी या नहीं। लेकिन बच्चों की खोजबीन के कुंवर के निर्देश के बाद यह संशय काफी हद तक दूर हो गया है।

अमूमन मुख्य स्वरूपों के चयन के लिए पहली स्वर परीक्षा रथयात्रा के दूसरे दिन होने की परंपरा रही है। इस बार रथयात्रा एक जुलाई को है। यानि दो जुलाई को पहली स्वर परीक्षा आयोजित की जा सकती है। चूंकि, श्रावण मास की चतुर्थी को ही प्रथम गणेश पूजन के साथ मुख्य स्वरूपों का प्रशिक्षण शुरू हो जाता है इसीलिए स्वरूप चयन की प्रक्रिया उससे पहले पूरी करना अनिवार्य बाध्यता है। जबकि रामलीला अनंत चतुर्दशी के दिन यानि नौ सितंबर से शुरू होगी।

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