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MGKVP : Media चौथे संतंभ के साथ ही समाज की चौथी संपत्ति- Vice Chancellor TN Singh

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में नेशनल वेबीनार का आयोजन

कोरोना काल में हिंदी पत्रकारिता विषय पर चर्चा

Varanasi : हिंदी का पहला समाचार पत्र उदंत मार्तंड़ का अर्थ उगता हुआ सूर्य है। यह सूर्य हमेशा सत्य ज्ञान, नई दिशा और विश्वास का प्रेरणा देता रहा है। हम बहुत ही सौभग्यशाली हैं कि हमे सूर्य और चांद दोनों की रोशनी मिलती है। अगर हम पश्चिम की बात करते हैं तो कोरोना महामारी के संकट काफी ज्यादा है। वहीं, पूर्वी दिशा की हम बात करें तो नागलैंड, आसाम सहित अन्य जगहों पर कम मामले हैं। उक्त बातें मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान और पूर्वांचल पोस्ट फाउंण्डेशन उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर कोरोना महामारी में हिंदी पत्रकारिता के भूमिका विषय पर आयोजित राष्ट्रीय वेविनार में अध्यक्षीय संबोधन करने में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर टीएन सिंह ने कहीं। कहा, मीडिया को मैं चौथा स्थतंभ नहीं बल्कि चौथी संपत्ति मानता हूं। इसे संरक्षित रखना समाज का कर्तव्य है। मीडिया एक सूर्य की तरह सूक्ष्म तथ्यों का विश्लेषण करके खबरों को प्रसारित करता है। पत्रकार कभी भी माहौल नहीं बनाता। वह जो देखते हैं वे अपने व हम सब जैसे पाठक को खबर के रुप में प्रस्तुत करते हैं। सोशल मीडिया ने कहीं न कहीं समाज के वातावरण को अशांत करते हुए उत्तेजना पैदा की। फेकिंग न्यूज से कहीं न कहीं विश्वनियता पर प्रश्न उठ रहा है। हम सबको कटघरे में नहीं खड़ा कर सकते हैं।

कहा, जो 30 वर्षो में लाखों करोड़ो खर्च करने के बाद भी नहीं हुआ वह मात्र 60 दिनों हो गया। आज गंगा मां स्वच्छ और निर्मल बह रही हैं। डिजिटल इंडिया ने भी कोरोना संकट में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दिया।

विशिष्ठ अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक मध्य प्रदेश के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के संस्थापक विभागाध्यक्ष डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना संकट में काफी चुनौतियों का सामना करते हुए हिंदी पत्रकारिता अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर लोगों तक खबरों के माध्यम से आवाज पहुंचा रही है। इस समय हिंदी पत्रकारिता संभावनाओं में संवेदनाएं प्रगट कर रही है। जो लोगों का एक सहारा बना हुआ है। निर्बल को सबलता प्रदान कर रही है, और उन्हें नई गति व उनके अंदर विश्वास प्रदान करने में एक सुदृढ़ आवाज बनकर उभरी है। ऐसे में जब लोगवअपने राजनैतिक उद्देश्य कर पूर्ति कर रहें हो उसमें पत्रकार अपनी पत्रकारिता के माध्यम से जनमानस को सशक्त बनाने का काम कर रहे हैं। पत्रकारिता एक स्तंभ के रुप में सदियों से रहा है और रहेगा। जब देश में संकट आती है वैसे में लोगों को पत्रकारिता एक आवाज के रुप में मिलती है।

राष्ट्रीय वेविनार में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वशिष्ट नारायण ने पत्रकारिता के बारिकियों को बताया। मुख्य रुप से पूर्वांचल विश्वविद्यालय के डॉ. दिग्गविजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील, डॉ. अवध विहारी सिंह, हिमाचल से डॉ. कौशल पांडेय, डॉ. लक्ष्मी कांत पाठक, डॉ. राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से डॉ. साधना श्रीवास्तव, डॉ. छोटे लाल, डॉ. रविन्द्र पाठक, डॉ. ममता पांडेय, विभा पांडेय, विनय कुमार, रितेश वर्मा, देवेंद्र राय, शुभम, गौरव शुक्ला, राम आशीष भारती, रेनू सोनकर, मुश्ताक अहमद, मनोज राय, अंकिता, महेश कुमार वर्मा, विवेक जायसवाल सहित 100 से अधिक शामिल थें।

पत्रकारिता संस्थान के निदेशक प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के नाते पिछड़े और देहात क्षेत्रों में कोरोना महामारी से बचाव की सूचना पहुंच सकी है। यह हिंदी पत्रकारिता का सबसे बड़ा योगदान है। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत कुमार ने किया।

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