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Monthly Review meeting : पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम का सख्ती से पालन का निर्देश, बोलीं ADCP ममता रानी- बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना जरूरी

Varanasi : बच्चों के साथ हमें इस तरह का व्यवहार करना चाहिए जिससे उनका कोमल मन कुंठित न हो। उनकी छोटी-छोटी बातों और समस्याओं को सुनकर उसका निदान करना चाहिए। यह सब तभी संभव होगा जब बाल अधिकारों के प्रति हम सभी लोग संवेदनशील होंगे। ADCP महिला अपराध और नोडल अधिकारी विशेष किशोर पुलिस इकाई ममता रानी चौधरी ने बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक में उक्त विचार व्यक्त किया।

ट्रैफिक लाइन स्थित सभागार में हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम में न्यायालय की ओर से पारित निर्णय का कड़ाई से अनुपालन करें।

उन्होंने निर्देश दिया कि न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए समय से सभी कार्रवाई को कोर्ट में उपलब्ध कराने और पीड़ितों को सूचित किए जाने में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए, चाहे वह मामले के विवेचक हों या न हों। बाल पुलिस कल्याण अधिकारी के रूप में उन्हें अपने पदीय कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक पालन करना चाहिए।

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष स्नेहा उपाध्याय ने कहा कि चाहे हम घर पर हों या फिर कार्यस्थल पर अथवा समाज में किसी स्थान पर भी बाल उत्पीड़न, बंधुआ मजदूरी अथवा लैंगिग उत्पीड़न का पता चलता है तो उसके प्रति संवेदनशील होना चाहिए। यह सोच कर कि यह हमारे अपने बच्चे के साथ हो रहा है। ऐसा करने वालों को तत्काल रोकने-टोकने के साथ ही जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाना चाहिए।

बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह ने बैठक में आये बाल पुलिस अधिकारियों से कहा कि हमें इस तरह का माहौल बनाना चाहिए जिससे कोई भी बच्चा अपने साथ हो रहे उत्पीड़न की शिकायत बेहिचक बता सके। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि बाल अधिकारों को दिलाने में उनकी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनको चाहिए कि उनके पास बच्चों के संबंध में आने वाली हर शिकायत को गंभरीता से लें और उसका हर संभव समाधान करने की कोशिश करें।

उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों की रक्षा के लिए हम सभी को अपने कार्यक्षेत्र के दायरे से उठकर कार्यकरना होगा। मासिक समीक्षा बैठक में कमिश्नरेट के थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के अलावा श्रम विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी शामिल थे।

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