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बनारस का मोस्ट वांटेड मुंबई से गिरफ्तार : साल 2001 में पहली बार सामने आया था इनामिया मनीष का नाम, माफिया सुभाष ठाकुर की सरपरस्ती में कई वारदातों को दिया है अंजाम

Varanasi : अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच टीम ने बनारस के मोस्ट वांटेड इनामिया बदमाश जंसा निवासी मनीष सिंह को मुम्बई से गिरफ्तार कर लिया है। वाराणसी में मनीष के ऊपर हत्या, लूट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के 11 मुकदमे दर्ज हैं। इस दौरान लोगों का विरोध का भी सामना करना पड़ा। बाद में असलियत की जानकारी होने पर लोगों को गुस्सा शांत हुआ। सूत्रों की माने तो मनीष सिंह जंसा थाना क्षेत्र के दीनदासपुर गांव का निवासी व आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात सुभाष ठाकुर का गुर्गा है।

याद होगा, करीब एक दशक पूर्व बाबतपुर रोड स्थित सैम्स के निदेशक आरके सिंह और अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजीत देवानी की हत्या में भी 50 हजार इनामिया मनीष का नाम शामिल था। महाराष्ट्र के बकोला थाने में भी मनीष पर हत्या के प्रयास सहित मकोका एक्ट में मुकदमे दर्ज हैं। वह पिछले डेढ़ दशक से मुंबई में ठिकाना बना रखा था। उसकी गिरफ्तारी किए जाने के बाद एसटीएफ और वाराणसी पुलिस भी फास्ट हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही पुलिस की एक टीम अहमदाबाद रवाना होगी।

अजीत देवानी की हत्या

पुलिस के डोजियर के अनुसार, उसका नाम 20 वर्ष पूर्व मुंबई में 30 जून 2001 को फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सचिव अजीत देवानी की हत्या में सामने आया था। इस हत्याकांड में कुख्यात बदमाश अबु सलेम और चोलापुर के इमिलिया गांव निवासी दीपक सिंह दीपू का भी नाम सामने आया था। दीपक सिंह दीपू को साल 2009 में बिहार के विक्रमगंज थाना क्षेत्र में एक लूट कर भागते समय बिहार पुलिस ने मार गिराया था।

जरायम की दुनिया में नाम

मनीष ने युवावस्था में ही अपराध का दामन थाम लिया था। साल 2007 में रथयात्रा पर एक शादी समारोह में शामिल होने आए सैम्स के निदेशक आरके सिंह की हत्या में उसने सुपारी ली थी। आरके सिंह हत्याकांड में साजिश रचने के आरोपित अशोक तलरेजा पर फायरिंग में भी मनीष आरोपित था। कैंट थाने की पुलिस ने 24 मई 2010 को 50 हजार का इनाम घोषित किया था।

दिनदहाड़े की थी फायरिंग

जानकारी के मुताबिक, मनीष सिंह ने वर्ष 2012 में आरके सिंह हत्याकांड में साजिशकर्ता रहे अशोक तलरेजा पर दिनदहाड़े फायरिंग की थी। इसी दिन शाम को लूट की नियत से रोहनिया में आढ़ती हरिनाथ पटेल की गोली मारकर हत्या की थी। माफिया सुभाष ठाकुर की सरपरस्ती में इसने कई वारदातें की।

मिली थी कमान 

माफिया मुन्ना बजरंगी के आपराधिक तरीके से अर्जित की गई कई करोड़ों की संपत्ति का पता लगाने और संपत्ति को बचाने की कमान बदमाश मनीष सिंह को मिली थी। मुन्ना बजरंगी की हत्या के तीन माह बाद ही वाराणसी में पंचायत हुई थी,उसमें मनीष सिंह को मुंबई से बुलाया गया था। 

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