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Political किस्से : हनुमान भक्त हैं Bihar के कृषि और सहकारिता मंत्री, दफ्तर में तस्वीर टांगने को कुछ लोग बता रहे असंवैधानिक

Ajit Mishra

Bihar : ज्ञानिनाम अग्रगण्यम सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि। शस्त्रों में महाबली, संकटमोचन भगवान हनुमानजी को ज्ञान, राजनीति, बल और मर्यादा का रक्षक व प्रतीक माना गया है। लेकिन सवाल उठता है कि इतने विशेषणों से युक्त भगवान को कोई व्यक्ति अपना आदर्श या पूज्य मानता है तो कहीं से भी इसे असंवैधानिक माना जा सकता है क्या? बहुतेरे लोग इसे गलत नहीं मानेंगे लेकिन बिहार के नवगठित मंत्रिमंडल के कृषि एवं सहकारिता मंत्री हनुमान भक्त अमरेंद्र प्रताप सिंह के द्वारा अपने सरकारी कार्यालय में हनुमानजी का फोटो टांगने पर कुछ लोग बखेड़ा खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।

कृषि और सहकारिता मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह भोजपुर जिले के आरा विधानसभा से बीजेपी के विधायक हैं। उनसे जब ऑफिस में हनुमानजी की तस्वीर लगाने को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं हनुमानजी का भक्त हूं। मेरे दिन की शुरुआत भगवान की प्रार्थना से होती है। लेकिन इस आस्था को लेकर मंत्री जी पर सवाल उठने भी शुरू हो गये हैं। यहां के कर्मचारी भी कहते हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है। अभी तक कार्यालय में सुविख्यात मृतक लोगों का ही चित्र टंगा मिलता था लेकिन पहली बार किसी मंत्री ने भगवान का चित्र लगाया है जिससे कर्म के प्रति सादगी और कर्मठता की प्रेरणा मिलती रहेगी।

विभाग से जुड़े एक अधिकारी का कहा था कि शपथ के बाद मंत्री के कार्यालय में आने से पहले ही पवनपुत्र हनुमान की तस्वीरें यहां लगाई गई हैं। खुद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को ऐसा करने के आदेश दिया था। मंत्री जी के आदेश की वजह से किसी ने भी इस पर आपत्ति नहीं जतायी। हालांकि, अमरेंद्र प्रताप सिंह से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं हनुमानजी का भक्त हूं। मेरे दिन की शुरुआत भगवान की प्रार्थना से होती है। उन्होंने आगे कहा कि ये व्यक्तिगत चीज है और इसका कोई अलग मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। लेकिन एक अधिकारी का कहना था कि यह गलत व्यवहार है। कार्यालयों में ऐसा कोई भी कदम सरकारी नियमों का उल्लंघन है। क्योकि इस कदम से दूसरे धर्म को मानने वालों के बीच गलत संदेश जाएगा।

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सौरव तिवारी का कहना है कि कुछ लोग इसे संविधान विरोधी कह सकते हैं लेकिन किसी कार्यालय में चित्र टांगने को लेकर संविधान में कोई स्प्ष्ट व्याख्या नहीं है। इस बारे में राजद नेता श्रीनिवास सिंह यादव का कहना था कि यह मंत्री पद की शपथ के खिलाफ है। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को किसी विशेष धर्म के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करने का अधिकार नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस बात का राजनीतिक तौर पर विरोध तो अनेक लोग कर रहे हैं। कई लोग धार्मिक मामला होने के कारण अपना नाम आगे नहीं आने देना चाहते हैं। यह भी आश्चर्य नहीं है कि राजनीति में दोहरे चरित्र के लोगों की भरमार है।

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