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रामलीला का 29वां दिन : प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी, हनुमानजी ने आगमन की जानकारी दी, उत्तर कांड के दोहा का सस्वर पाठ

Sanjay Pandey

Varanasi : रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के उन्नतीसवें दिन शुक्रवार को भरत मिलाप की लीला उत्तर कांड के दोहा एक से ग्यारह तक का सस्वर पाठ सम्पन्न हुआ।

प्रसंग के अनुसार, हनुमानजी ब्राम्हण के रूप में नंदीग्राम पहुंचते हैं, यहां हनुमानजी ने भरतजी को श्रीरामजी के अयोध्या आगमन की सूचना देते हैं।

भरतजी उन्हें नहीं पहचान पाए तो पवनसुत हनुमान ने अपना परिचय दिया। भरतजी ने विनम्रतापूर्वक श्रीराम दूत हनुमानजी से कहा कि आपने यह प्रिय वचन सुनाकर मुझे ऋणी कर दिया है, मैं कभी उऋण नहीं हो पाऊंगा।

यहीं पर हनुमानजी भरतजी से विदा मांगकर श्रीरामजी के पास पहुंचते हैं। उधर, भरतजी अयोध्या पहुंचकर सभी से श्रीरामजी के आगमन की खबर सुनाते हुए अयोध्या के सीमा पर सभी नगरवासियों के साथ पहुंचते हैं, जहां चारों भाइयों का मिलन होता है।

भगवान श्रीराम ने बारी-बारी से भरत और शत्रुघ्न को गले मिलते ही भातृ विरह की वेदना चारों भाइयों की आंखों से आंसू के रूप में निकाली। यहीं पर श्री रामजी ने सुग्रीव आदि से गुरु वशिष्ठ को प्रणाम करने को कहते हैं, गुरु वशिष्ठ से बताते हैं कि ये हमारे मित्र हैं।

वहीं अयोध्या स्थित महल पहुंच कर श्रीरामजी माता कैकेई को समझाते हैं। गुरु वशिष्ठ ब्राम्हणों से श्रीराम को सिंहासनारुढ़ करने की आज्ञा मांगते हैं। ब्राम्हणों के द्वारा स्वीकृत मिलते ही राज्याभिषेक की तैयारी का आदेश देते हैं।

सुमंत बताते हैं कि सभी तैयारियां पूरी हैं। अयोध्या में श्रीराम राज्याभिषेक की तैयारी होने लगती है, यहीं पर आज की आरती होती है।

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