Breaking Exclusive Varanasi ऑन द स्पॉट धर्म-कर्म पूर्वांचल 

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला : शूर्पणखा का नासिका छेदन, सीता हरण के साथ रावण का अंत तय हुआ

Sanjay Pandey

Varanasi : वसुंधरा को राक्षसों से मुक्त करने के प्रभु श्रीराम के संकल्प आगे बढ़ गए। शूर्पणखा नासिका छेदन के साथ इसकी नींव पड़ गई तो सीता हरण के साथ रावण का अंत भी तय हो गया। रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के सोलहवें दिन शनिवार को शूर्पणखा नासिका छेदन, खर -दूषण वध, सीता हरण व रावण जटायुराज युद्ध प्रसंगों का मंचन किया गया। पंचवटी में प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण का मोहक स्वरूप देख राक्षसी शूर्पणखा मोहित हो जाती है। सुंदर स्त्री का रूप धारण कर रिझाने आती है।

इसमें सफल न होने पर क्रोधित हो असली रूप दिखाती है और सीता को डराती है। प्रभु श्रीराम के इशारे पर लक्ष्मण उसके नाक-कान काट लेते हैं। शूर्पणखा पूरा वृतांत अपने भाई खर-दूषण को बताती है और ललकारती है। बहन की दुर्दशा से आक्रोशित खर-दूषण सेना लेकर हमला कर देते हैं। प्रभु श्रीराम, खर-दूषण का वध करते हैं, इससे प्रसन्न देवता आकाश से पुष्प वर्षा करते हैं।

शूर्पणखा लंका जाती है और रावण को आप बीती सुनाती है। सोच-विचार के बाद रावण, सीता के हरण की योजना बनाता है और मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण कर वहां जाने का निर्देश देता है।स्वर्ण मृग देख सीता, श्रीराम से उसकी खाल लाने को कहती हैं।

श्रीराम, सीता की सुरक्षा लक्ष्मण को सौंप, धनुष बाण लेकर मृग रूपी मारीच के पीछे दौड़ जाते हैं। देर होने पर लक्ष्मण वन में देवताओं से सीता की रक्षा का आग्रह कर श्रीराम को खोजने जाते हैं। इस बीच रावण संन्यासी रूप धारण कर सीता का हरण कर ले जाता है। आकाश मार्ग मे जटायु रावण से जूझ जाते हैं।

इसमें रावण जटायु का पंख तलवार से काट देता है और वे श्रीराम का स्मरण कर गिर पड़ते हैं। रावण सीता को राक्षसियों के सुरक्षा घेरे में अशोक वाटिका में रखता है। दूसरी ओर श्रीराम, लक्ष्मण को वन में अपने पीछे देख चिंतित हो जाते हैं। कुटिया लौटते हैं और सीता को न पाकर दुखी हो जाते हैं। यहीं पर आरती के साथ लीला को विश्राम दिया जाता है।

You cannot copy content of this page