Varanasi उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म 

रंगभरी एकादशी : रजत सिंहासन के साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य शुरू, ग्यासुद्दीन तैयार कर रहे शाही पगड़ी, किशनलाल बना रहे वस्त्र

Varanasi : काशी अब धीरे-धीरे फाल्गुन के रंग में रंग चुकी हैं। मगर उसे अभी होली के हुड़दंग की इजाजत नही मिली है। काशिवाशियो को हुडदंग की इजाजत तब मिलेगी जब भोले के साथ माँ गौरा गौने आएंगी और उनके नयनाभिराम दर्शन पाकर काशीवासी होली खेलने की शुरुआत करेंगे। काशी के परम्परा अनुसार शिवरात्रि पर भोलेनाथ का विवाह होता है और उसके बाद पड़ने वाले आमलकी एकादशी (रंगभरी एकादशी) पर बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराते है और काशिवासियो क साथ अबीर-गुलाल खेलते है। साथ ही उनको होली खेलने की अनुमति प्रदान करते है। 

आगामी 24 मार्च को रंगभरी एकादशी को यह बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराएंगे। वधु पक्ष से गौने की रस्म विश्वनाथ मंदिर के महंत कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम आवास पर अदा की जाएगी। इस संदर्भ के बातचीत में बताया कि गौने की तैयारियां अंतिम चरण में है। बाबा के रजत पालकी एवं सिंहासन का साफ-सफाई एवं रंग-रोगन का का कार्य भी पूर्ण हो गया है।पालकी में की गई मीनाकारी भी और चटक की गई है। रजत पालकीएवं बाबा के गर्भगृह में विराजमान होने वाले राज सिंहासन की साफ-सफाई भक्तगण अंतिम रूप देने में लगे है। इसी पालिका पर विराजमान होकर बाबा विश्वनाथ माता पार्वती व गोद मे भगवान प्रथमेश को लेकर कैलाश जाएंगे।

21 मार्च से शुरू होगा लोकाचार

महंत आवास 21 मार्च से 24 मार्च तक के लिए गौरा के मायके में तब्दील हो जाएगा। यह परंपरा 356 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी उत्सव का 357वां वर्ष है। लोकाचार की शुरुआत 21 मार्च से टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर होगी। 21 मार्च को गीत गवना, 22 मार्च को गौरा का तेल-हल्दी होगा। 23 मार्च को बाबा का ससुराल आगमन होगा। बाबा के ससुराल आगमन के अवसर पर विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के सदस्य शंकर त्रिपाठी ‘धन्नी महाराज’ के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा स्वतिवाचन, वैदिक घनपाठ और दीक्षित मंत्रों से बाबा की आराधना कर उन्हें रजत सिंहासन पर विराजमान कराया जाएगा। इस वर्ष होने वाले समस्त धार्मिक अनुष्ठान अंकशास्त्री पं. वाचस्पति तिवारी के संयोजकत्व में महंत परिवार के सदस्यों द्वारा किए जाएंगे।

तैयार हैं गौरा शंकर के शाही परिधान

बाबा के लिए खादी के शाही वस्त्र बनकर तैयार हैं। बाबा के परिधानों की सिलाई टेलर मास्टर किशनलाल ने की है। विगत दो दशक से वही बाबा के परिधान सिल रहे हैं। इस बार परिधान निर्माण में उनकी शिष्या इंटर की छात्रा  नम्रता टण्डन ने सहयोग करते हुए माता के परिधान पर हाथों से  कढ़ाई की है। बाबा की अकबरी पगड़ी केशवदास मुकुंदलाल गोटावाले नारियल बाजार चौक की ओर से सजाई जाती है। पगड़ी को आकार मोहम्मद गयासुद्दीन देते हैं। फर्म के संचालक नंदलाल अरोड़ा कहते है जो पगड़ी बाबा धारण करते हैं वह हमारे पूर्वजों के समय से बनती आ रही है।इसकी साजसज्जा, कलगी पर जरी की बूटी, नगीना हम अपने हाथ से सजाते हैं।

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