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कथा का सातवां दिन : परिक्रमा मात्र से होता है सभी पापों का नाश- आशुतोषानंद गिरी

Varanasi : संसार में कहीं भी किया गया पाप काशी में आने पर नष्ट हो जाता है। काशी के अलावा जितने भी तीर्थ हैं उन सभी तीर्थों में स्नान दान का फल है। काशी प्राप्ति का फल है भगवान विश्वनाथ की प्राप्ति। चौबेपुर के सोनबरसा में चल रहे शिव महापुराण और रूद्र चंडी महायज्ञ के सातवें दिन स्वामी आशुतोषानंद गिरि ने भक्तों को यह जानकारी दी।

कहा कि अन्य क्षेत्रे कृतम् पापं, तीर्थ क्षेत्रे विनश्यति। तीर्थक्षेत्रे कृतं पापं, वज्र लिपो भविष्यति।। अर्थात अन्यत्र किए गए पाप तीर्थ में नष्ट हो जाते हैं, परंतु तीर्थ में किए गए पाप बज्र लेख हो जाते हैं, इस समस्या का समाधान करते हुए भगवान वेदव्यास जी कहते हैं कि तीर्थ क्षेत्र में किए हुए पाप परिक्रमा करने से नष्ट हो जाते हैं। परिक्रमा में किए हुए पाप गर्भ गृह के दर्शन से नष्ट होते हैं, इसलिए वर्ष में एक बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

महाराज जी ने बिल्व वृक्ष के बारे में बताते हुए कहा कि बिल्व वृक्ष में समस्त देवताओं का वास होता है। विल्व वृक्ष के नीचे दीपदान करने से घर में लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। भस्म धारण करने से देहा अभिमान नष्ट होता है और त्रिपुंड धारण करने वाले के दर्शन से शिव जी की भक्ति बढ़ती है, इसलिए नित्य प्रति त्रिपुंड धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष पहनने मात्र से यमदूत स्पर्श नहीं करते।

इस अवसर पर मुगलसराय के विधायक रमेश जायसवाल, इंजीनियर अशोक यादव, भाजपा प्रदेश मंत्री मीना चौबे, अमरीश सिंह भोला, डॉ. गिरीश चंद्र चतुर्वेदी, डॉक्टर अरुण त्रिपाठी मौजूद रहे। सबका स्वागत किसान मोर्चा के जिला महामंत्री पवन चौबे और जिला उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने किया।

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