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नहीं रहे श्रीकाशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष : संस्कृत के विद्वान पद्मश्री आचार्य रामयत्न शुक्ल का निधन से विद्वत समाज में शोक की लहर

Varanasi : श्रीकाशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष और संस्कृत के विद्वान पद्मश्री आचार्य रामयत्न शुक्ल का मंगलवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बीते एक हफ्ते से वह बीमार थे और एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। यह जानकारी मिलते ही काशी के विद्वत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। आचार्य शुक्ल 90 वर्ष की आयु में भी शंकुलधारा पोखरा स्थित अपने घर पर विद्यार्थियों से घिरे रहते थे।

वह युवा छात्रों को संस्कृत व्याकरण के सूत्रों पर व्याख्यान देते रहते थे। आचार्य शुक्ल पिछले वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किए गए थे। बता दें कि आचार्य रामयत्न शुक्ल का जन्म भदोही जिले में वर्ष 1932 में हुआ था। उनके पिता राम निरंजन शुक्ल भी संस्कृत के विद्वान थे। उन्होंने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी और स्वामी चैतन्य भारती से वेदांत शास्त्र, हरिराम शुक्ल से मीमांसा और पंडित रामचंद्र शास्त्री से दर्शन व योग शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी।

आचार्य शुक्ल बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आचार्य के पद पर काम किए थे। वह संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग के आचार्य और अध्यक्ष रहे थे। आचार्य शुक्ल अष्टाध्यायी की वीडियो रिकार्डिंग करा कर नई पीढ़ी को संस्कृत का निशुल्क ज्ञान देने का प्रयास आखिरी समय तक करते रहे। इसके लिए उन्हें 2015 में संस्कृत भाषा का शीर्ष सम्मान विश्व भारती प्रदान किया गया था।

काशी के विद्वत समाज ने जताया दुख

आचार्य शुक्ल के निधन पर श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने कहा कि काशी के विद्वत समाज का एक सूर्य अस्त हो गया है। आचार्य शुक्ल की भरपाई कभी नहीं हो सकती है। संस्कृत व्याकरण के वह मूर्धन्य विद्वान थे। उधर, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत जगत की यह बहुत बड़ी क्षति है। इस उम्र में भी आचार्य शुक्ल जिस तरह से युवाओं को संस्कृत का ज्ञान बांटते थे, वैसा उदाहरण कहीं और देखने को मिला।

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