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SSU ने पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए भेजा इतने रुपये का प्रस्ताव : ये दुर्लभ ग्रंथ है मौजूद

Varanasi : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दुर्लभ ग्रंथ एवं पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए विश्वविद्यालय ने 1.09 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को संरक्षण का प्रस्ताव भेज दिया है। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से दुर्लभ ग्रंथ एवं पांडुलिपियों का प्रकाशन होगा। हस्तलिखित पांडुलिपि एवं 2022-23 एवं 2023-24 के 56 प्रकाशन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। विश्वविद्यालय से 1400 ग्रंथों का प्रकाशन हो चुका है। सरस्वती भवन पुस्तकालय में सन 1791 से संग्रहीत लगभग 96 हजार हस्तलिखित पांडुलिपियों का प्रकाशन हो सका है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के सहयोग से प्रस्ताव भेजा गया है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि लीथो कागज, भोज पत्र तथा ताड़ पत्र पर हस्तलिखित पांडुलिपियों की सुरक्षा की जा रही है।

ये दुर्लभ ग्रंथ हैं मौजूद

विश्वविद्यालय में वैदिक वाङ्मय , व्याकरण शास्त्र , न्यायदर्शन, धर्मशास्त्र, जैन दर्शन, ज्योतिष शास्त्र, दर्शन शास्त्र, तंत्र शास्त्र, साहित्य शास्त्र, प्राचीन भारतीय राज शास्त्र एवं अर्थशास्त्र तथा पौराणिक वाङ्मय से संबद्ध है। विश्वविख्यात अनुसंधान पत्रिका ‘सारस्वती सुषमा ‘ एवं विश्वविद्यालय वार्ता के कई अंकों का प्रकाशन भी समाहित है। उक्त कार्य योजना के तहत मुद्रित होने वाले ग्रंथों के सकल व्यय, जैसे प्रतिलिपिकरण, संपादन, पाठ लोचन, व्याख्या-लेखन, परिशिष्ट निर्माण, कंप्यूटर कंपोजिंग, फिल्म निर्माण, प्लेट निर्माण, आफसेट छपाई, जेके, बाइंडिंग सामग्री, पक्की बाइंडिंग एवं प्रूफरीडिंग के व्ययों को समाहित कर अनुमानित आगणन प्रस्तुत किया गया है।

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