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भारतीय नव वर्ष के स्वागत में ‘स्वर्वेद यात्रा’ : विहंगम योग संस्थान द्वारा देश के 23 राज्यों में 267 स्थलों पर निकाली गयी दिव्य यात्रा

सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान द्वारा आयोजित सप्ताह व्यापी ‘स्वर्वेद यात्रा’ में देश के 23 राज्यों में 267 स्थलों पर भव्य एवं दिव्य ‘स्वर्वेद यात्रा’ निकाली गई। इसी क्रम में स्वर्वेद महामंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित सद्गुरु सदाफल देव आप्त वैदिक गुरुकुलम के छात्रों एवं आश्रम वासियों द्वारा विहंगम स्वर्वेद यात्रा निकाली गयी। जिसमें गुरुकुल के लगभग तीन सौ बच्चों सहित आश्रम से जुड़ें सैकड़ों लोगों ने विहंगम योग के प्रमुख सैद्धांतिक महाग्रंथ ‘स्वर्वेद’ को सरमाथे रखकर तरयाँ से, डुबकियां, पूरनपट्टी, पियरी, खरगीपुर होते हुए स्वर्वेद महामंदिर धाम पहुंचे। जहाँ सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने सभी को दर्शन व आशीर्वाद दिया।

इस अवसर पर सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अपने आशीर्वचन के दौरान कहा कि नवसंवत्सर की यह तिथि समृद्ध भारतीय संस्कृति का परिचायक है। समस्त चराचर जगत् में नवजीवन का अनुप्राणित होना, जीवन का सनातन संदेश देता है। हमसब भारतीय नववर्ष पर अपनी संस्कृति, जो धर्म से लेकर मोक्ष तक की यात्रा कराती है, जो विश्व की आदि संस्कृति है, उसके प्रति नतमस्तक हो रहे हैं। भारत की संस्कृति- त्याग में, श्रद्धा में, समन्वय में, सहयोग में, सेवा में, साहचर्य में, सहजता में, विनम्रता में और मानवता के गुणों में ही हमें बसा देती है।

हमारी भारतीय संस्कृति अपने लिए नहीं, अपनों के लिए जीना सिखाती है। भारतीय जीवन का अर्थ है- अध्यात्मिक जीवन से, सेवामय जीवन से, सत्संगमय जीवन से और साधनामय जीवन से भारत में रहकर हमारा जीवन ही भारतीय न हो यह अच्छी बात नहीं है, यह तो अविद्या है साहब! भारतीय जीवन ही अध्यात्मिक जीवन है । सदैव महापुरुषों के पथ पर चलाना, उनके द्वारा बताये गए मार्ग का अनुसरण करना यही तो सन्देश है हमारे भारत का।

नववर्ष के शुभारंभ पर आज 23 राज्यों के 267 स्थानों पर स्वर्वेद यात्रा का सफल आयोजन अध्यात्म–प्रेमियों के समुन्नत चेतना का द्योतक है। यात्रा में शामिल सभी स्वर्वेद–पथिकों का जीवन भी नव उत्साह, उमंग, ऊर्जा और नित्य ज्ञान से भरा रहे। इस अवसर पर महामंदिर प्रबंधन समिति से बी.पी. सिंह, यू.पी. सिंह, श्री विनोद भाई भादारका, श्री सुरेन्द्र यादव, राम भजन, भरत दूवे, गौरव , अभिषेक सिंह, रोहित सिंह, मनोज शर्मा, मनीष विश्वकर्मा जी तथा गुरुकुल के शिक्षक नितोष आर्य, करुणा सागर मिश्र, शशि रंजन सिंह, रंजीत कुमार, सतीश आदि उपस्थित रहे।

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