Education Varanasi 

शिक्षक सम्मान संगोष्ठी : बच्चा जो बनना चाहता है उसे वह बनने दें- प्रोफेसर सीमा सिंह

Varanasi : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की काशी इकाई द्वारा सुधाकर महिला पीजी कॉलेज पांडेपुर में शिक्षक सम्मान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुरुआत सरस्वती प्रतिमा और सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का माल्यार्पण और अंग वस्त्र तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के प्रभारी डॉक्टर जगदीश सिंह दीक्षित द्वारा कहा गया कि शिक्षकों का सम्मान करने से स्वयं को भी शिक्षक सम्मानित महसूस करता है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर दीनानाथ सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के व्यक्तित्व की चर्चा किया। अंतर विश्वविद्यालयी अध्यापक शिक्षा केंद्र बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर प्रेम नारायण सिंह, मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह आदि ने अपने विचार रखे। कहा कि बच्चा जो बनना चाहता है उसे वह बनने दें।

इस अवसर पर प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्रोफेसर शीला मिश्रा, नीलम राय, शीला यादव, मधु मिश्रा, गायत्री सिंह, डॉ. ब्रह्मचारी शंभू नाथ, प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह, प्रोफेसर दुर्ग विजय सिंह, डॉ. विनोद कुमार राय, डॉ .विनय कुमार सिंह, डॉक्टर सत्य प्रकाश सिंह, डॉक्टर धीरेंद्र सिंह, प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार उपाध्याय, प्रोफेसर अरुण कुमार उपाध्याय, डॉक्टर शशिनाथ नाथ सिंह, डॉक्टर दीनानाथ तिवारी, डॉक्टर वशिष्ठ यति, गुलाब राम गुप्त, जनता सिंह यादव, राम अवध सिंह यादव, जनार्दन सिंह, देवेंद्र पांडेय, श्रीकांत पांडेय, डॉ. यशवंत सिंह, भारतीश मिश्र, प्रशांत कुमार गौड़, डॉ. सुरेश चंद्र चौबे आदि शिक्षकों को सम्मानित किया गया। डॉ. अशोक कुमार पांडेय, डॉ. मंजू त्रिपाठी, डॉक्टर रोली, डॉक्टर मनोरमा का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर दीनानाथ सिंह द्वारा की गई। संचालन प्रोफेसर अंजू सिंह द्वारा व धन्यवाद ज्ञापित अमिताभ मिश्र द्वारा किया गया। प्रोफेसर राजनाथ, प्रो. वीके निर्मल, प्रो. ओपी चौधरी, प्रोफेसर ललिता राव, लहजू कुशवाहा, कमलेश बहादुर सिंह, प्रोफेसर नलिन कुमार मिश्र, संगीता मिश्रा, डॉ. प्रमोद पांडेय, प्रदीप यादव, वरुण चतुर्वेदी, विमल कुमार सिंह आदि मौजूद थे।

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