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सोना उगलने वाली जमीन की जांच करने पहुंची टीम : खोदाई के दौरान मिला पांच किलो का बेलनाकार पत्थर, प्राचीन सभ्यता से जोड़कर देखा जा रहा, जानिए Youth View

Santosh Pandey

Bihar : कई दिन पहले सोने के सिक्के मिलने की सूचना के बाद बक्सर का गिरधर बरांव गांव अचानक चर्चा में आ गया है। बताते हैं कि 20 मार्च को जिस जमीन में एक महिला को सोने के तीन प्राचीन सिक्के मिले थे, वहां खोदाई के दौरान कुछ ऐसी वस्तुएं भी मिली हैं जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। यहां पुरातत्व विभाग ने 15 स्क्वायर मीटर के दायरे में खोदाई कराई।

पांच किलो का बेलनाकार पत्थर और कुछ विचित्र कंकड़ मिले। पुरातत्व विभाग के अधिकारी इन वस्तुओं को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए अपने साथ ले गए हैं। खेत पर अब भी पुलिस का पहरा है। वहीं, सोनवर्षा ओपी पहुंचकर अधिकारियों ने तीनों सिक्कों को भी पुलिस से अपने अधिकार में ले लिया।

पुरातत्व अधिकारी डॉ. हर्ष रंजन कुमार ने बताया कि यहां मिले सोने के सिक्के और पत्थर काफी प्राचीन हैं। तीन-चार दिनों तक इसका अध्ययन कर अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद ही जांच की अगली दिशा तय होगी। पुरातत्व अधिकारी की मानें तो यहां से प्राचीन सभ्यता की कई अहम जानकारियां मिल सकती है।बात करें तो इस खेत में करीब 10 साल पहले भी 5 किलो ग्राम का बिल्कुल ऐसा ही एक और पत्थर मिल चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, खेत में काम करने के दौरान स्थानीय ग्रामीण सुमेरु पाल को यह पत्थर मिला था, जिसे वह अनाज तौलने के लिए बाट के रूप में प्रयोग करता था। सुमेरु पाल ने बताया कि इसी खेत में काम करने के दौरान कुदाल से मिट्टी हटाने पर बेलन आकर का पत्थर मिला था।

पटना से पहुंचे अधिकारी डॉ. हर्ष रंजन ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि अगर इस जमीन से आगे भी कुछ अजीबो गरीब चीज बरामद होती है तो उसे तुरंत प्रशासन को सौंप दें। माना जा रहा है कि यह पत्थर सिंधु सभ्यता कालीन है। इधर, क्षेत्रीय लोगों में यहां के प्राचीन इतिहास को जानने को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। बताया जाता है कि स्थानीय केसठ गांव में प्राचीन काल में चेरो खरवारों का काफी समृद्ध साम्राज्य था।

कुछ साल पहले गांव के पच्छिम छोर पर मिट्टी का एक बड़ा टीला हुआ करता था लेकिन प्रशानिक उपेक्षा के कारण वह टीला अवैध अतिक्रमण का भेंट चढ़ गया। लोगों ने इस पूरे टीले की मिट्टी काटकर अपने घर भर लिए।यदा-कदा यहां से भी कुछ मिलने की चर्चा होती रही है। आज भी बचे-खुचे हिस्से पर अवैध अतिक्रमण काबिज है।

Youth View

केसठ गांव के निवासी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आर्कियोलॉजी के शोध छात्र पुष्कर रवि ने कहा कि बिहार सरकार और पुरातत्व विभाग अपने धरोहरों को लेकर गंभीर नहीं है। यह चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि अभी भी अपने कब्जे में लेकर केसठ के पुरातात्विक धरोहर को बचाया जा सकता है।

लेकिन इसकी उम्मीद दूर-दूर तक नहीं दिख रही है। गिरधरबराव गांव में सोने के सिक्के मिलने के बाद लोग इसे चेरो खरवारो के काल से भी जोड़ कर देख रहे हैं। सिक्कों को इस वंश के चर्चित केशवाराज (जिसके नाम पर केसठ गांव का नाम पड़ा) कालीन बताया जा रहा है। अब सैंधव सभ्यता कालीन पत्थर मिलने से यहां की संस्कृति चेरो खरवार के शासन से भी बहुत पुरानी मानी जा रही है।

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