Varanasi काशी-तमिल समागमम् 2022 

पद्मश्री मालिनी अवस्थी के सुरों से सजा सुबह-ए-बनारस का मंच: बोलीं- काशी-तमिल संगमम सरकार की सार्थक पहल

Varanasi : ‘यह मेरा सौभाग्य है। महादेव की नगरी और ऊपर से गंगा जी के किनारे अस्सी घाट पर यहां अनवरत संगीत की सेवा हो रही है। यहां गंगा जी के आरती के बाद विश्व कल्याण के लिए यज्ञ किया जाता है। आज मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है। मुझे यहां बुलाया गया है।’

उक्त बातें लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अस्सी घाट पर सामजिक-सांस्कृतिक संस्था सुबह-ए-बनारस की नौवीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं। मालिनी अवस्थी यहां बतौर मुख्य अतिथि पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने अपनी गायकी से समा भी बांधा तो काशी में चल रहे काशी तमिल संगमम को सरकार की सार्थक पहल बताया।

इस दौरान वैदिक ऋचाओं उच्चारण के साथ दैविक शक्तियों का आह्वान किया गया। गंगा आरती और वैदिक यज्ञ के बाद मालिनी ने अपनी प्रस्तुति पेश की, जिसे सुनकर उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। चिड़ियों की चहचहाहट और गंगा के पानी के कलरव के बीच पद्मश्री मालिनी अवस्थी का गायन अलग ही अनुभूति करवा रहे थे।

गायन के बाद उन्होंने कहा कि किसी को अपने घर में बुलाया नहीं जाता। आज मेरा अवसर आया कि इतने अच्छे और इतने विद्वान मेरे सामने बैठ कर हमें सुन रहे थे। यह एक कलाकार के लिए सौभाग्य की बात होती है।

आज मैं यहां बैठे-बैठे अपने गुरु का स्मरण कर रही थी। श्रद्धेय अप्पाजी पूरे विश्व में कहीं भी जाएं तो कहती थीं कि काशी की भोर प्रसिद्ध है। काशी कोई व्यक्ति आए और उसे यहां की भोर देखनी हो तो वह सुबह-ए-बनारस मंच पर आए। यहां गाकर आज बहुत आत्मिक शांति मिली है।

मालिनी अवस्थी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। कहा कि यह प्रधानमंत्री की एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना है। उनकी सोच हमेशा से यह रही है कि भारत के लोग किस प्रकार से आपस में मजबूती के साथ एक हों।

काशी और कांची यदि आप देखें तो जैसे काशी सांस्कृतिक राजधानी है वैसे ही कांचीपुरम भी है। यह सरकार की सार्थक पहल है और ऐसे संगमम पूरे देश में होने चाहिए।

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