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श्रीराम कथा के छठवें दिन अयोध्याकांड की कथा : बोले राजन जी महाराज- पूर्व से सूर्य का पता नहीं चलता है, सूर्य से पूर्व का पता चलता है

Varanasi : बड़ागांव ब्लॉक के कुड़ी गांव में एक शिक्षण संस्थान में चल रहे नौ दिनी श्रीराम कथा के छठवें दिन अयोध्याकांड की कथा कहते हुए मानस मर्मज्ञ राजन जी महाराज ने अपने अमृतवाणी से कथा मंडप में उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश दिया। कहा कि बिना सत्कर्म किए सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती, इसलिए मनुष्य को सदैव सत्कर्म करते रहना चाहिए।

राम कथा को आगे बढाते हुए बोले, एक दिन चक्रवर्ती राजा दशरथ अपने कक्ष में लगे दर्पण में देखें तो उन्हें कान के पास एक केश श्वेत दिखा जिस पर वह सोचने लगे कि मानो केश कह रहा हो महाराज हमने तो अपना रंग बदल लिया अब आप अपना वेश कब बदलेंगे। अब आपको राजगद्दी का भार राम को सौंप देना चाहिए। इसी सोच को लेकर वह गुरुदेव के पास गए। गुरु जी से राम की विशेषता बताते हुए उन्हें पुरुषोत्तम बताते अपने मन की अभिलाषा व्यक्त की।

महाराज जी ने आगे बताया कि उधर राम को सबसे ज्यादा प्रेम करने वाली माम कैकेयी भी रामजी की इच्छा से ही चक्रवर्ती सम्राट से दो वर मांग लिया। क्योकि रामजी ने पहले ही कहा था कि मां जब मुझे पिताजी राजगद्दी सौंपे तो तुम मुझे वन भेज देना। इसके साथ ही कैकेयी भरत को राजगद्दी सौंपने की बात कह कर उनकी परीक्षा भी लेना चाहती थी।

राम कथा में मुख्य यजमान सपत्नीक बलवंत सिंह और बुलबुल मिश्र द्वारा व्यासपीठ, पवित्र रामचरितमानस और कथा मंडप की आरती की गई। मंच संचालन इंद्रदत्त मिश्र ने किया।

कथा पंडाल मे ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधी दीपक सिंह, प्रिंस पांडेय, राहुल सिंह, मुख्य आयोजक मुनीष मिश्र, अखिलेश दत्त मिश्र, विकास दत्त मिश्र, प्रकाशदत्त मिश्र, अरविंद मिश्र सीताराम, रवींद्र मिश्र सोनू, आशुतोष मिश्र, शुभम मिश्र, शिवम मिश्र, अनीष मिश्र, मनीष मिश्र दीपू, अंकित मिश्र, अर्पित मिश्र, प्रखर मिश्र ,सोनू मिश्र जीडी, शिखर मिश्र सहित अन्य भक्त मौजूद थे।

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