Education Politics Varanasi 

वर्तमान जीवन की चुनौतियों में भारतीय संस्कृति की उपयोगिता : रमेश जी बोले- स्वत्व से विमुख होना मुख्य चुनौती है, प्रखर राष्ट्रवाद ही समस्या का समाधान है

Varanasi : उदय प्रताप महाविद्यालय और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को वर्तमान जीवन की चुनौतियों में भारतीय संस्कृति की उपयोगिता विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता रमेश जी प्रांत प्रचारक काशी प्रांत ने कहा कि भारतीय संस्कृति धर्म और जाति पर आधारित नहीं है।

यह एक ऐसी जीवनशैली है जिससे हम अपने देश के साथ-साथ दुनिया को भी संरक्षित कर सकते हैं। भारत विश्व गुरु के रूप में हमेशा से जाना जाता था। हमें धर्म और जाति से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद तथा भारतीय संस्कृति का पाठ पढ़ना होगा। प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि यूपी कॉलेज में विद्या के साथ-साथ राष्ट्रवाद भी पढ़ाया जाता है।

उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म और संस्कृति का सर्वाधिक प्रभाव उदय प्रताप कॉलेज परिसर में दिखाई देता है, राजर्षि जी की इस बगिया में जिस भाव से इसकी स्थापना की गई थी, वह पूरा हो रहा है। इस देश को संस्कारों से ही बचाया जा सकता है। अध्यात्म दुनिया को भारत की देन है। युवाओं का आह्वान करते हुए प्रांत प्रचारक ने कहा कि युवा आज का नागरिक है। ज्ञान शील एकता से ही देश को और मजबूत बनाया जा सकता है।

उधार ली हुई जीवन पद्धति से हम सभी को बाहर आना होगा। कोविड काल में जब दुनिया के तमाम देश परेशानियों से घिर गए उस समय भी भारत को उसके संस्कारों और संस्कृति ने ही बचाया है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने भारतीय संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति का तुलनात्मक विवेचना करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति दुनिया के विभिन्न संस्कृतियों से एकदम अलग और विशिष्ट है। महाविद्यालय के प्राचार्य ने भारतीय संस्कृति की गतिशीलता, सचेतनता, परस्परावलंबन, और वसुधैवकुटुंबकम की अवधारणा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि नई युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और भारतीय संस्कृति का उनके अंदर समावेश होना चाहिए। भारतीय संस्कृति के समावेश होने से युवा पीढ़ी तमाम कुरीतियों से बच सकती है। बुद्ध की करुणा और गांधी के सत्य के साथ अहिंसा के प्रयो हम सभी लोगों के लिए आज भी मार्गदर्शक सिद्धान्त है।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने धर्म और संस्कारों की विस्तार से व्याख्या किया।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरे राम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता पर आधारित है। विशेष रूप से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र की समृद्धि एकता व अखंडता के लिए अनेक महापुरुषों ने अपने जीवन का बलिदान कर दिया। भारतीय संस्कृति के मुख्य स्रोतों पर अत्यधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषा और भारतीय संस्कार विषय को समायोजित किया गया है जो एक राष्ट्र को अखंड बनाने के लिए आवश्यक है। प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि न्यायोचित मार्ग से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करना ही हमारी संस्कृति है।

प्राचार्य डॉ. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन मोमेंटो देकर किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. शशि कांत द्विवेदी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन उदय प्रताप इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने किया। संगोष्ठी में बलदेव महाविद्यालय बड़ागांव के पूर्व प्राचार्य डॉ. बब्बन सिंह, डॉ. उमाकांत ने भाग लिया।

संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. सुधीर कुमार शाही, डॉ. संजय कुमार शाही, सुधीर कुमार राय, पंकज कुमार सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. मनोज प्रकाश त्रिपाठी डॉक्टर सपना सिंह, डॉ. अभिषेक सिंह डॉ. विवेक सिंह , डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. डीपी शाह , डॉक्टर तुषार कांत, डॉक्टर नवीन कुमार झा, डॉ. विजय कुमार, पिंटू यादव, रंजना श्रीवास्तव, मधु सिंह और छात्र-छात्राएं मौजूद थीं।

You cannot copy content of this page