Health Varanasi 

दो दिनी मंथन : बोले डॉक्टर- पैटर्न स्कैनिंग लेजर तकनीकि के इस्तेमाल से कम वक्त में आंखों का इलाज संभव

Varanasi : उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय, वाराणसी के भौतिकी विभाग और डीबीटी स्टार कॉलेज स्कीम के संयुक्त तत्वाधान में दो दिनी नेशनल सिंपोजियम ऑन लेजर इन बायोलॉजी, मेडिकल साइंस, एटमॉस्फेरिक साइंस और क्लाइमेट एंड क्लाइमेट चेंज के द्वितीय दिन के व्याख्यान में डॉ. प्रशांत भूषण (IMS BHU) ने नेत्र सर्जरी में विभिन्न प्रकार के लेजर के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया हमारे देश में बहुतायत लोग मधुमेह से प्रभावित हैं जिसका प्रभाव नेत्र की रोशनी पर पड़ रहा है। नेत्र रोग में यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

नेत्र रोग फंडस की जांच ऑप्थलमोस्कोपी या फंडस फोटोग्राफी द्वारा सरलता से की जा रही है। वर्तमान में पैटर्न स्कैनिंग लेजर (पास्कल) तकनीक एक बेहतर विधि के रूप में कि जा रही है। यह एक एनडी याग लेजर है जिसका उपयोग नेत्र चिकित्सा विज्ञान में किया जा रहा है। इन तकनीकों के उपयोग से बहुत कम समय में नेत्र रोग का इलाज संभव है और रोगी को बहुत कम असुविधा होती है।

प्रोफेसर तपस चक्रबर्ती (निदेशक, आईएसीएस, कोलकाता) ने बताया कि लेजर का प्रयोग कर के वायुमंडल में नाइट्रस ऑक्साइड का संघठन कैसे पता किया जा सकता है। नाइट्रस एसिड हाइड्रॉक्सिल रेडिकल्स का एक प्रमुख स्रोत है, जो क्षोभमंडल में प्राथमिक ऑक्सीडेंट हैं।

ओएच वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों को हटाने में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं और इसलिए वातावरण में कई मानवजनित प्रजातियों के भाग्य का निर्धारण करते हैं।

प्रोफेसर आलोक चंद्र गुप्ता (एआरआईईएस, नैनीताल) ने विशालकाय ब्लैक होल ब्लैजर का बहुतरंग दैर्ध्य निरीक्षण और इसके विभिन्न प्रकार को बताया। साथ ही साथ इन्होंने ब्लैजर की उपयोगिता के बारे में विस्तार से चर्चा की।

प्रोफेसर आरएस पांडेय (एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा) ने विभिन्न रेडियल दूरियों पर शनि के मैग्नेटोस्फीयर में व्हिस्लर मोड तरंग के बारे में बताया। साथ ही साथ घटाए गए वितरण फंक्शन की रैखिकता का उपयोग शनि के मैग्नेटोस्फीयर में व्हिस्लर मोड तरंगों के फैलाव संबंध को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि व्हिस्लर मोड तरंग की पीढ़ी के लिए प्रभावी पैरामीटर तापमान अनिसोट्रॉपी, सापेक्ष कारक, आयाम और घटाए गए वितरण फंक्शन की चौड़ाई हैं।

परिणाम व्यापक आवृत्ति रेंज पर वीएलएफ उत्सर्जन की व्याख्या करने और सैटर्नियन मैग्नेटोस्फीयर में प्लाज्मा मापदंडों के निदान प्रदान करने में महत्वपूर्ण हैं। समापन सत्र में प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने सिंपोजियम की सफलता पर आभार व्यक्त किया। आयोजन सचिव डॉ. दयानंद साहा और डॉ. डीके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन बहादुर सिंह, डॉ. उपेंद्र कुमार, डॉ. विजय कुमार, डॉ. तुषार कांत श्रीवास्तव, डॉ. पिंटू यादव, डॉ. तुमुल सिंह, डॉ. अमित श्रीवास्तव, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, दिव्यांशु और अमिष उपस्थित थे।संयोजक डॉ. शशिकांत द्विवेदी ने कहा भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे।

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