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BHU के सिद्धांत दर्शन विभाग द्वारा दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी : आयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों की प्रयोज्यता पर मंथन

Varanasi : काशी हिंदू विश्विद्यालय के.एन उडुपा ऑडिटोरियम में आयुर्वेद संकाय के सिद्धांत दर्शन विभाग द्वारा दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी आरम्भ हुई। संगोष्ठी का विषय ‘भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य प्रबंधन रणनीतियों को डिजाइन करने के लिए आयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों की प्रयोज्यता’ रखा गया है।पहले दिन, इस विषय पर संगोष्ठी में उपस्थित आयुर्वेद विषय के विद्वानों ने अपनी राय रखी।

मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश संगीत कला अकादमी के अध्यक्ष, पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य, विशिष्ट अतिथि के तौर पर महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कुलपति प्रो. ए. के सिंह, आई.एम.एस के निदेशक प्रो. एस. के सिंह उपस्थित थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. वी. के शुक्ला (रेक्टर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय) ने की तथा सिद्धांत दर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो. सी.एस पांडे, प्रो. रानी सिंह, डॉ. देवानन्द उपाध्याय, डॉ. दिनेश कुमार मीणा, डॉ. सुदामा सिंह यादव उपस्थित रहे। यह संगोष्ठी आयुर्वेद संकाय के प्रमुख के. एन द्विवेदी के मार्गदर्शन में आरम्भ हुई।

संगोष्ठी में आयुर्वेद संकाय, रचना शारीर विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. कमलेश्वर नाथ सिंह की पुस्तक ‘ मानव गर्भावक्रान्ति शरीर’ का विमोचन भी हुआ। इस मौके पर प्रो. कमलेश्वर नाथ सिंह ने बताया कि इस पुस्तक द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान को सरलता से समझा जा सके इसके लिए उन्होंने भरपूर प्रयास किया है। बताते चलें कि मानव गर्भावक्रान्ति शारीर के लेखक डॉ. कामेश्वर नाथ सिंह विगत चौबीस वर्षों से अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं तथा उनके द्वारा 110 से अधिक शोधपत्र, लेख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं।

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