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Varanasi: Add food to Akshaya Patra at Anganwadi centers will get good results: Governor

Varanasi : बनारस पहुंची प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सोमवार को सर्किट हाउस में बैठक के दौरान कहा कि भारत में दुनिया के सापेक्ष सबसे ज्यादा स्तन कैंसर व सर्वाइकल कैंसर के केस है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रारंभिक जांच कराई जा सकती है और जहां संभावना दिखे उसे उच्च स्तर के अस्पताल भेजें। प्रारंभिक स्टेज में कैंसर का इलाज अच्छे से हो जाता है। ऐसी व्यवस्था कर ले कि उत्तर प्रदेश में कैंसर से किसी महिला की मृत्यु नहीं हो। माताओं को बचाना है। बच्चों को गोद लेने में मंदिर के ट्रस्टी को भी जोड़ें। समर्थ किसान गांव में आंगनवाड़ी में अपनी उपज के फल-सब्जी देकर सहयोग कर सकते हैं। हर किशोरी का ब्लड टेस्ट कराएं। एनीमिक किशोरी को दवा दिलाएं। कोई किशोरी एनीमिक नहीं हो, तभी वह जब माता बनेगी तो स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी। यूनिवर्सिटी में बच्चियों, उनके मां-बाप-अभिभावकों, चिकित्सकों के साथ वे सम्मेलन करें। संस्कार सिखाने की सेना में प्रतिस्पर्धा कराएं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री को देखें कि उसे कितना ज्ञान है लेखन, कहानी, जानकारी का तभी वह बच्चों को दे पाएगी।

भारत को विश्व गुरु बनने के लिए आंगनबाड़ी, महिलाओं, बच्चों, केंद्रों के भवन स्थिति व कार्यपद्धती पर ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि गुजरात मे मंत्री बनने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आईसीडीएस की अलग विभाग बनवाकर आदर्श आंगनवाड़ी की परिकल्पना देकर कार्य कराना शुरू किया था। आंगनवाड़ी कार्यकत्री के प्रमोशन में उनकी शिक्षा व परफारमेंस को गहनता से परीक्षण कर प्रमोशन करें। अच्छे वर्कर से रिजल्ट अच्छा आता है। गुजरात मॉडल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अच्छे कार्य करने वाले जिलाधिकारी सहित वहां की आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिका को हजारों रुपए का “माता यशोदा अवार्ड” दिया जाता है। इससें लोगों में प्रति स्पर्धा के साथ अच्छा काम करने की उत्कंठा होती है।

राज्यपाल ने कुपोषित बच्चों के सर्वे में लंबाई व वजन के साथ उसकी पावर व पैरों में सूजन को भी पैरामीटर में रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ से वार्ता में उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में एक जैसा वातावरण नहीं है। इसलिए कुपोषण सर्वे का पैरामीटर वहां की जलवायु एवं परिस्थिति को ध्यान में रखकर किये जाएं, तभी वास्तविकता सामने आएगी। कुपोषण के लिए मूंगफली, शुगर व दूध पाउडर का पेस्ट सुझाया और इसे घर पर बच्चों को देने हेतु माता-पिता को दें। डेयरी को प्रेरित कर वहां दूध लेने वाले लोगों से कुछ-कुछ ग्राम दूध बच्चों हेतु देने को प्रोत्साहित कर उसे कुपोषित बच्चों को दिलाया जाए। आंगनवाड़ी केंद्रों पर अक्षय पात्र से भोजन व्यवस्था जोड़ना अच्छा परिणाम मिलेगा। आंगनवाड़ी व प्राइमरी में बच्चे सत्र की शुरुआत से भर्ती कर उन्हें सिखाएं। उनकी जन्मतिथि जो भी हो उसे उस समय अंकित करें। इससे समय से उनमें प्रतिभा बढ़ेगी।

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