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Varanasi Gyanvapi Case : एडवोकेट हरिशंकर जैन बोले- उनको शर्मिंदा होना चाहिए कि वो सत छुपा कर बैठे थे, अभी और चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे

Varanasi : भारत के लिए और काशी (Kashi) के लिए बहुत ही आश्चर्यजनक और खुशी के पल हैं। भगवान भोलेनाथ (Lord Bholenath) को 352 साल (352 years) से कैद (imprisoned) करके रखा गया था, आज वो स्वतंत्र (Free) हो गए हैं और सत्यता जनता के सामने आ गयी है। उक्त बातें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन (Senior Advocate Harishankar Jain) ने अस्पताल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहीं। इसी अस्पताल में उनका 16 मई से तबियत खराब होने बाद से इलाज चल रहा था। आज स्वस्थ होने के बाद उन्होंने अपने बेटे विष्णु जैन के साथ प्रेस कांफ्रेंस की।

आलोचना और समालोचना होती रहती है पर सत्य किसी आलोचना-समलोचना से नहीं डरता है। सत्य सामने आ गया है और यह ऐसा सत्य है जिसने सबकी आंखें खोल दी हैं। कोई फाउंटेन कह रहा है कोई कुछ कह रहा है तो कहने को आदमी कुछ भी कह देगा। अभी आगे भी जांच होगी। नीचे कहां तक शिवलिंग गया है वो सामने आएगा और काफी चौकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।

अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने आगे कहा कि ‘हमको खुशी है कि जिस काम को हमने शुरू किया था जिसकी शुरुआत के उस समय सबने आलोचना की थी। सबने कहा था कुछ नहीं सब बकवास है। आज प्रकट हो गए भगवान सामने दिख गए भगवान, सत्य की विजय हुई है। मुझे उम्मीद है कि वहां बहुत जल्दी ही शिव का भव्य मंदिर बन जायेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि जिस दिन शिवलिंग मिला है उस दिन मेरी तबियत नहीं ठीक थी। मैं अपने कमरे पर था और जैसे ही मुझे इस बात का पता चला मैंने अपने सहयोगियों को बुलवाकर एक दरख्वास्त लिखवाई और उसे तुरंत कोर्ट भेजवाया। फिर अपने बेटे के साथ अस्पताल चला आया और मुझे यहां शाम के 3 बजे एडमिट कर दिया गया।

वहीं जब उनसे पूछा गया कि आप की तबियत खराब है और आप दिल्ली वापस जा रहे हैं अब जब हियरिंग होगी तो क्या आएंगे आप तो उन्होंने कहा कि तबियत का क्या है भोलेनाथ चाहेंगे तो कल ठीक हो जाऊंगा और परसों वापस आऊंगा। इस केस से जुड़े हैं और आखरी सांस तक जुड़े रहेंगे। माहौल खराब करने के आरोपों पर अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि हमारे भगवान बद्द्तर हालत में रहे हैं और हम माहौल को देखें तो हमें ऐसा माहौल नहीं चाहिए हमें फिक्र नहीं कि माहौल बिगड़े या सही रहे। उन लोगों को शर्मिंदा होना चाहिए कि वो सत्य को छुपा कर बैठे हुए थे।

फव्वारे की बता पर हरिशंकर जैन ने कहा कि यदि वो फव्वारा है तो उसे चलकर दिखा दें। 352 साल पहले कौन सी व्यवस्था थी कि वहां फव्वारा लगाया गया। उन्होंने कहा कि वह शवलिंग है और बहुत नीचे तक गया है इसलिए उस स्थान को साफ करके देखना होगा जिसके बाद कई चौकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।

ओवैसी के बयान कि वहां मस्जिद थी है और रहेगी पर हरिशंकर जैन ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी कह सकते हैं कि वहां मस्जिद थी लेकिन मैं भी कह रहा हूं वहां शिवलिंग है। बाकी चीजें कोर्ट डिसाइड करेगा। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि ओवैसी को मुझसे अधिक कानून का ज्ञान हो पर एक बात तो साबित है कि जो पूजा स्थल किसी अन्य धर्म का होता है वहां किसी अन्य धर्म की पूजा मान्य नहीं होती।

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