Varanasi धर्म-कर्म 

काशी की विख्यात नागनथैया : कालिया तैयार, कान्हा का इंतजार

काशी की विख्यात नागनथैया कल

एसपी सिटी ने महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र के संग किया लीला स्थल का भ्रमण

Varanasi : काशी के लक्खा मेले में शुमार तुलसीघाट की विख्यात नाग नथैया की लीला कल यानी बुधवार को होगी जिसकों लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। तुलसीघाट पर कालिया नाग के प्रतिरूप को अंतिम रूप दे दिया गया। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा 450 साल पहले शुरू कराई गई लीला का प्रमुख प्रसंग बुधवार को दोपहर तीन बजे जीवंत होगा। इसमें विशाल नाग पर के फन पर चढ़ प्रभु श्रीकृष्ण जल में परिक्रमा करते हुए दर्शन देंगे। लीला समिति सदस्यों के साथ मिल कर माझी समाज के लोगों ने लगभग 12 फीट लंबे नाग को आकार दिया है। लीला से ठीक पहले नाग को जल में डुबा दिया जाएगा। उससे पूर्व मंगलवार को एसपी सिटी विकास चन्द्र त्रिपाठी ने सुरक्षा के मद्देनजर तुलसीघाट और लीला स्थल का भ्रमण क़िया। तैयारियों के बाबत महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र से मुलाकात की और आयोजन को लेकर वार्ता किया गया। 

बुधवार की शाम तुलसीघाट ब्रज बनेगा और मां गंगा बनेगी यमुना। ठीक शाम 4.40 बजे प्रभु श्रीकृष्ण कदंब की डाल से कूदेंगे और कालियनाग को नाथ कर उसके फन पर नृत्य मुद्रा में वेणु वादन करते दर्शन देंगे। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास की ओर से आयोजित इस लीला की ख्याति बनारस के लक्खा मेला के रूप में है। काशी में प्रतिवर्ष गोस्‍वामी तुलसीदास जी के द्वारा स्‍थापित मानी जाने वाली इन नागनथैया के आयोजन की मान्‍यता काशी ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वांचल में है। शिव की नगरी काशी में अनोखा नजारा होगा जब हर हर महादेव के साथ मोर मुकुट बंशी वाले की जय का नारा एक साथ फ‍िजा में घुलेगा और काशी में माहौल पूरी तरह भक्ति भाव में डूब जाएगा। काशी नरेश भी आयोजन में शामिल होंगे और आयोजकों को स्‍वर्ण मुद्रा (सोने की गिन्‍नी) प्रदान करने की परंपरा का भी निर्वाह करेंगे।

भीड़ न जुटाने की अपील

वहीं कोरोना महामारी को देखते हुए महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने काशीवासियों से घाट पर भिड़ न लगाने की अपील की है। बताया कि बच्चे और बुजुर्ग घरों पर ही रहे। लीला स्थल पर इस वर्ष सीमित लोग ही मौजूद रहेंगे। बोले, घर से भक्त भगवान की आराधना करें। 

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