Varanasi उत्तर प्रदेश 

Varanasi Latest news : स्मार्ट सिटी के तहत इस घाट पर चल रहा था खोदाई का कार्य, मिला विशाल शिवलिंग, बोले अधिकारी…

Varanasi : भगवान शिव की नगरी काशी मानव को ही नहीं बल्कि देवताओं को भी प्रिय है। यही वजह है कि देव दीपावली जैसा महापर्व केवल इसी शहर में मनाया जाता है। यहां के कण-कण में शंकर और घर-घर में मंदिर है। विश्वनाथ धाम निर्माण कार्य के दौरान भवनों के ध्वस्तीकरण और खोदाई के दौरान कई पौराणिक शिवलिंग व देव विग्रह मिले है।

गुरुवार को दशाश्वमेध घाट पर भी खोदाई के दौरान एक विशाल शिवलिंग मिला। जिसके बाद खोदाई का कार्य रोक दिया गया है। दरअसल, स्मार्ट सिटी योजना के तहत घाटों पर एलईडी लाइट्स को लगाने के लिए खोदाई का कार्य चल रहा है। गुरुवार को दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस के समीप मंच के ठीक ऊपर चल रहे खोदाई के दौरान विशाल शिवलिंग मिला। जिसके बाद खोदाई का कार्य रोक दिया गया।

शिवलिंग मिलने की जानकारी होते ही देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी है। सम्बंधित अधिकारियों का कहना है कि जांच के लिए पुरातत्व विभाग की टीम आएगी। जिससे यह पता चल पाए की शिवलिंग कितने वर्ष पुरानी है। वही स्थानीय लोगों का कहना है कि सैकड़ों वर्ष पुरानी शिवलिंग हो सकती है।

यह है दशाश्वमेध घाट की मान्यता

दशाश्वमेध घाट के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।काशीकेदार महात्म्य के अनुसार ब्रह्मा जी ने काशी के इसी गंगा तट पर दस अश्वमेघ यज्ञ किया था, इसी संदर्भ के अनुसार ही घाट का नामकरण हुआ। शिवरहस्य के अनुसार यहाँ पहले रुद्रसरोवर था परंतु गंगागमन के बाद पूर्व गंगापार, दक्षिण दशहरेश्वर, पश्चिम अगस्त्यकुंड और उत्तर सोमनाथ इसकी चौहद्दी बनी। यहाँ प्रयागेश्वर का मंदिर है। डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल का अनुमान है कि दूसरी शताब्दी में प्रसिद्ध भारशिव राजाओं ने कुषाणों को परास्त कर दस अश्वमेध यज्ञ करने के पश्चात यहीं पर स्नान किया था तभी से इसका नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा। सन् 1735 में घाट का निर्माण बाजीराव पेशवा ने कराया था। पूर्व में इस घाट का विस्तार वर्तमान अहिल्याबाई घाट से लेकर राजेन्द्रप्रसाद घाट तक था। सन् 1929 में यहाँ रानी पुटिया के मंदिर के नीचे खोदाई में अनेक यज्ञकुंड निकले थे।

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