Varanasi उत्तर प्रदेश धर्म-कर्म 

Varanasi : सभी धर्मों के बीच सेतु बनायेगा रामपंथ, संत दीक्षा में शामिल हुए विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू

विश्व का पहला राम मंदिर जहां सभी के साथ विराजेंगे प्रभु श्रीराम

दीक्षा और गुरु मंत्र लेकर डॉ. राजीव ने संत का जीवन स्वीकार किया

Ajit Mishra

Varanasi : नवरात्रि में श्रीरामपंथ की स्थापना ने समाज सुधार आंदोलन और श्रीराम की आस्थावाद के विस्तार के इतिहास में एक नया अध्याय लिख लिया। इंद्रेश नगर लमही में स्थापित श्रीइंद्रेश आश्रम की ओर से आयोजित संत दीक्षा समारोह में बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने अपने आध्यात्मिक गुरु इंद्रेश कुमार से वैदिक रीति रिवाजों के साथ विभिन्न धर्मों-जातियों के धर्मगुरुओं, वैदिक ब्राह्मणों, संतो की उपस्थिति व वैदिक ब्राह्मण पंडित अनुज पांडेय और पंडित प्रदीप शास्त्री की देखरेख में काशी के 11 वैदिक ब्राह्मणों के मंत्रोचारण के साथ संत दीक्षा और गुरु मंत्र प्राप्त किया। संत दीक्षा प्राप्त करने के बाद डॉ. राजीव ने भिक्षाम् देही कह कर भिक्षा प्राप्त की। डॉ. राजीव श्रीवास्तव सुभाष भवन, सुभाष मंदिर, विशाल भारत संस्थान, अनाज बैंक, चिल्ड्रेन्स बैंक जैसे प्रसिद्ध संस्थाओं के संस्थापक हैं। उन्होंने 31 वर्ष तक समाज की सेवा कर कीर्तिमान स्थापित किया। अभी हाल में ही अयोध्या श्रीराम पीठ के केंद्रीय व्यवस्था प्रमुख बनाए गए थें। सामाजिक कार्यकर्ता और इतिहास के प्रोफेसर होने के साथ-साथ उन्होंने सैकड़ों अनाथ और निराश्रित बच्चों का पालन-पोषण किया है। अब संत की दीक्षा लेकर वह श्रीराम की आस्थावाद का प्रचार करेंगे। इंद्रेश आश्रम लमही में साकेत भूषण भगवान श्रीराम के परिवारजनों, मित्रों, सहयोगियों व सेवकों के लिए मंदिर निर्माण किया जाएगा। साकेत भूषण श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन और शिला पूजन पंडित अनुज पांडेय और पंडित प्रदीप शास्त्री ने विधिवत कराया।

साकेत भूषण श्रीराम मंदिर में बिना किसी भेदभाव के सभी का प्रवेश हो सकता है। यह मंदिर रामपंथ का पहला मंदिर होगा, जिसके निर्माण में दलित, किन्नर और मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। साकेत भूषण श्रीराम मंदिर की शिला पूजा प्रसिद्ध रामभक्त हनुमान चालीसा फेम नाजनीन अंसारी ने किया। भूमि पूजन इंद्रेश कुमार ने किया। साकेत भूषण श्रीराम मंदिर में धर्म युद्ध में भगवान के साथ रहने वाले सभी देवताओं, ऋषियों की मूर्ति स्थापित होगी। जामवंत, नल, नील, अंगद, जटायु, संपाती, अहिल्या, शबरी के साथ विभीषण, सुषेन वैद्य, त्रिजटा, गरुण और गिलहरी भी मौजूद रहेंगे। हर रविवार को साकेत भूषण श्रीराम की सभी दैवपुत्रों के साथ विशेष आरती की जाएगी। इंद्रेश कुमार, डॉ० राजीव श्रीवास्तव, नाजनीन अंसारी ने विभिन्न धर्मों के संतों, महात्माओं, धर्मगुरूओं की उपस्थिति में साकेत भूषण श्रीराम के साथ उनके सभी सहयोगियों, माता-पिता, भाई-बनन और मित्रों के मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन और शिला पूजन किया।

हरियाणा के उद्योगपति सुनील गोयल द्वारा आश्रम को भेंट की गई ‘श्रीराम राज्य वाहन’ का उद्घाटन किया गया। किसी भी तरह के भेदभाव से पीड़ित व्यक्तियों तक रामराज्य वाहन पहुंचकर पीड़ा को दूर करने का प्रयास करेगा।साकेत भूषण श्रीराम मंदिर को देखकर भगवान श्रीराम की कृपा सब पर है ऐसा दिखाई देगा। वानर, भालू, पशु, पक्षी, जंगलवासी, राक्षस भी प्रभु श्रीराम की शरण में आये, उन पर प्रभु की कृपा बरसी।

श्रीरामपंथ के प्रथम संत दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि इंद्रेश कुमार ने कहा कि मानव को स्वभाव से संत होना चाहिये। संतों का जीवन निर्मल और भेदभाव रहित होता है। डॉ. राजीव ने दीक्षा लेकर राममार्ग का चयन किया है, जो विश्व के कल्याण का ही मार्ग है। प्रभु श्रीराम का मानवीय जीवन मानव मूल्यों की स्थापना के लिये था। सद्भावना, शांति और प्रेम ही राम की भक्ति का दर्शन है। सच्चे अर्थों में रामपंथी किसी से भी धर्म जाति भाषा के आधार पर भेद नहीं कर सकता है। श्रीरामपंथ विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों व जातियों के बीच सेतु का काम करेगा। दुनियां भर के पीड़ित लोग जो भगवान श्रीराम के शरणगत हैं, उन पर श्रीराम की कृपा होती है। कर्मकांड को ही जीवन मूल्य न मानकर मानवता की सेवा को ही रामपंथ का मूल आधार माना जायेगा। इस अवसर पर मुंबई के आध्यात्मिक गुरू अरविंद नागर ने कहा कि रामपंथ पर दुनियां का हर व्यक्ति चलकर अपने परिवार देश और समाज को श्रेष्ठ बना सकता है। गया के श्मशान साधक और तांत्रिक चुन्ने साईं ने कहा कि मतों, पंथों के बीच समन्वय के लिये रामपंथ का उद्भव हुआ है। शैव हों, वैष्णव हों या फिर किसी भी धर्म या समुदाय के, राम पथ पर चलकर शांति सद्भावना से विश्व के प्रत्येक नागरिक का जीवन बेहतर बना सकते हैं।

दीक्षा समारोह की अध्यक्षता श्रीराम आस्थावादी दार्शनिक संत चट्टो बाबा ने किया। डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हनुमान चालीसा हवनात्मक यज्ञ से निकला है रामपंथ, जो बिना किसी भेदभाव के दुनिया को सामाजिक समरस्ता की रौशनी देगा। करूणा मैत्री, प्रीती ही रामपंथ के आधार हैं। सिर्फ मानव जाति ही नहीं समस्त सृष्टि से संबंध स्थापित करने का मार्ग होगा रामपंथ। न कोई भूख से पीड़ित हो और न कोई दीन हीन। यही रामपंथ, रामराज्य की प्राथमिकता थी। अब प्रभु श्रीराम के मानव लीला के चरित्र को अपनाने की जरूरत है। दीक्षा संस्कार में प्रमुख रूप से प्रो. एस.पी. सिंह, डॉ. नीलेश दत्त, मोईन खान, अभिजीत सिंह, आनंद मिश्रा, मनोज कुमार साह, शालिनी साह, आदित्य गुप्ता, प्रो. अशोक कुमार सिंह, अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डॉ. मृदुला जायसवाल, शिवदास मौर्य, रमेश शर्मा, डॉ. रीता जायसवाल, डॉ. भोलाशंकर, डॉ. गुंजा गुप्ता, अंजली यादव, नीधि राय, पूनम सिंह, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. खुशी रमन, इली भारतवंशी, उजाला, दक्षिता भारतवंशी, शालिनी, मो. अजहरूद्दीन, अब्दुल मजीद अंसारी, नगीना, सुनीता श्रीवास्तव, रमता श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव के साथ किन्नर समुदाय की निशा दीदी, ललिता दीदी, रानी दीदी, गीता दीदी आदि लोग शामिल थें।

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