Varanasi 

Varanasi : धार्मिक कट्टररपंथ विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा

पूर्व पुलिस अधिकारी शहीद टाइगर जोगिंदर सिंह की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं के उद्गार

Ajit Mishra

Varanasi : एक जमाने में घोड़े पर चढ़कर आतंक के पर्याय बने डाकू बुझारत को जिन्दा पकड़ने वाले दिलेर पुलिस अधिकारी जोगिन्दर सिंह को जनता ने टाईगर की उपाधि देकर अमर कर दिया। टाईगर जोगिन्दर सिंह की ईमानदारी और अपराधियों में टाईगर के खौफ की कहानियां आज भी प्रचलित हैं। आज भी पूर्वांचल के लोग टाईगर को बड़े सम्मान से याद करते हैं और पुलिस अधिकारियों से टाईगर की तरह बनने का ख्वाब पालते हैं। टाईगर जोगिन्दर सिंह नहीं रहे, लेकिन इस बात में जीने में क्या हर्ज है कि टाईगर होते तो ऐसा होता, टाईगर होते तो वैसा होता। टाईगर जोगिन्दर सिंह की स्मृति में विशाल भारत संस्थान एवं टाईगर जोगिन्दर सिंह मेमोरियल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में सुभाष भवन, इन्द्रेश नगर, लमही में धार्मिक कट्टरता को खत्म करने में पुलिस की भूमिका विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि जाने-माने कृषि वैज्ञानिक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एस०पी० सिंह, इतिहासकार प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह, दार्श्ाेनिक एवं चिंतक चट्टो बाबा, महंत बालक दास ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के मंदिर में दीपोज्वलन किया एवं टाईगर जोगिन्दर सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया।

संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुये मुख्य अतिथ प्रो० एस०पी० सिंह ने कहा कि धार्मिक कट्टरपंथ पूरे विश्व की शांति के लिये खतरा है। दुनियां धर्म के नाम पर हो रही हिंसा से पीड़ित है, पूरी मानवता की धर्म के लिये बलि दी जा रही है। भारत धार्मिक हिंसा को कम करने की ताकत रखता है। सतर्कता बरतने और निगरानी रखने से धार्मिक हिंसा के खतरे को कम किया जा सकता है। पुलिस अपने थाना क्षेत्र में हिंसा फैलाने वालों की सूची तैयार करे और सरकार कट्टरपंथियों की आर्थिक ताकत तोड़े। पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है, इस खतरे से निबटने के लिये। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो० अशोक कुमार सिंह ने कहा कि धार्मिक हिंसा पहले राज्य पोषित था जो अब सड़कों पर खुलेआम मानवता को कलंकित कर रहा है। तैमूर, नादिरशाह, बाबर सबने धर्म के नाम पर हिंसा को जायज ठहराकर शांति प्रिय भारत को कुचल दिया। आज पूरा यूरोप धार्मिक हिंसा की आग में झुलस रहा है। धार्मिक कट्टरपंथियों की वकालत भारत के सेकुलर बुद्धिजीवी करते हैं, जिससे उनके मंसूबे सफल हो रहे हैं। पुलिस बिना किसी भेदभाव के धार्मिक कट्टरपंथियों और उनके संरक्षकों, पक्षकारों को भी कानून के दायरे में लायें तभी इस समस्या का क्षेत्रीय हल निकल पायेगा।

विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष एवं इतिहासकार डा. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि धर्मगुरूओं को पुनः विचार करना चाहिये कि यदि धर्म शांति का मार्ग दिखाता है तो धर्म के नाम पर पूरी दुनियां में हिंसा क्यों हो रही है। धर्म के नाम पर कत्ल को जायज ठहराने वालों की जमात पूरी मानवता की दुश्मन है, इस जमात का पर्दाफाश जरूरी है। स्थानीय स्तर पर पुलिस और खुफिया एजेंसियां ऐसे लोगों के नाम उजागर करे जो धार्मिक हिंसा फैलाते हैं, उनकी मदद करते हैं। हिंसा फैलाने वालों से भी ज्यादा उनके मददगार गुनहगार हैं। पुलिस देश बर्बाद करने का मंसूबा पालने वालों के प्रति कोई सहानुभूति न दिखाये। कार्यक्रम के संयोजक टाईगर जोगिन्दर सिंह मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष डी०एन० सिंह ने कहा कि टाईगर जोगिन्दर सिंह की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 5 हजार रुपये का पुरस्कार धार्मिक कट्टरता से मुक्त कराने एवं मजहबी एकता स्थापित करने वाले किसी भी देश के नागरिक को दिया जायेगा, ताकि टाईगर की स्मृति लोगों के जेहन में बनी रहे और पुलिस अधिकारी उनकी तरह बनने का प्रयास करें। पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास ने कहा कि भारत की संस्कृति में शांति के बीज हैं। दुनियां का कोई भी देश भारत की संस्कृति का अनुशरण कर शांति स्थापित कर सकता है।

अध्यक्षता करते हुये चिंतक चट्टो बाबा ने कहा कि दुनियां को धर्म और राजनीति के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। संबंधों की संस्कृति विकसित करनी होगी। जहां संबंध संस्कृति नहीं होगी, वहीं मानवता खतरे में पड़ेगी। संगोष्ठी का संचालन अर्चना भारतवंशी ने किया एवं धन्यवाद मो० अजहरूद्दीन ने दिया। इस संगोष्ठी में डा. निरंजन श्रीवास्तव, आत्म प्रकाश सिंह, धनंजय यादव, फहीम अहमद, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डा. मृदुला जायसवाल, अशोक सहगल, खुशी रमन भारतवंशी, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, अजीत सिंह, सुनीता श्रीवास्तव, प्रभावति, सरोज देवी, गीता, किसुना, लीलावति, पार्वती, शीला, हीरामणी, नगीन, महनाज, मैना देवी, रमता श्रीवास्तव आदि लोगों ने भाग लिया।

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